सहारनपुर। एसबीडी जिला अस्पताल में एमआरआई (मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग स्कैन) की सुविधा मिलने का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। करीब 15 लाख रुपये खर्च कर तीन साल पहले एमआरआई के लिए बिल्डिंग तैयार की गई थी, लेकिन मशीन अभी तक नहीं मिली है। ऐसे में मरीजों को प्राइवेट सेंटरों पर जाना पड़ रहा है।
एमआरआई की सुविधा के लिए भी जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से कई साल पहले शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। शासन ने प्रस्ताव को मंजूर करते हुए धनराशि भी जारी कर दी थी। इस धनराशि से आंखों के ऑपरेशन थिएटर (आई ओटी) के सामने बिल्डिंग बनाई गई है। तब से जनपदवासी एमआरआई मशीन के स्थापित होने का इंतजार कर रहे हैं। वर्तमान में बिल्डिंग में कोविड वैक्सीनेशन सेंटर चल रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि एमआरआई मशीन की कीमत करीब दो करोड़ रुपये है, जिसकी वजह से मशीन नहीं मिल पा रही है। मशीन से दोनों तरह की एमआरआई होगी। जांच के लिए मरीजों को कोई पैसा नहीं चुकाना होगा।
एक घंटे में मिलेगी जांच रिपोर्ट
जनपद में दो प्राइवेट अस्पतालों के पास एमआरआई की सुविधा है, मगर उनके पास भी रेडियोलॉजिस्ट नहीं हैं। ऐसे में एमआरआई की रिपोर्ट बाहर से बनकर आती है, जिसमें 24 घंटे या उससे अधिक का समय लगता है। जिला अस्पताल में लगने वाली एमआरआई मशीनों पर पूरा स्टाफ रहेगा। रेडियोलॉजिस्ट मुंबई और लखनऊ में बैठते हैं। जहां से रिपोर्ट अधिकतम एक घंटे में तैयार होकर आएगी।
हजारों रुपये में होती है जांच
एमआरआई दो तरह का होता है। पहला सामान्य एमआरआई और दूसरा कंट्रास्ट एमआरआई। एमआरआई सिर, छाती, जोड़ों और पूरे शरीर का होता है। इसकी जांच के लिए जनपद में चार हजार रुपये से दस हजार रुपये तक लिए जाते हैं। गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों के लिए यह जांच कराना आसान नहीं रहता है। यदि अस्पताल में सुविधा शुरू होगी तो गरीब से गरीब मरीज की एमआरआई नि:शुल्क हो सकेगी।
एसबीडी जिला अस्पताल में सीटी स्केन और हीमो डायलिसिस जैसी बड़ी सुविधाएं हैं। एमआरआई की सुविधा के लिए बिल्डिंग बनकर तैयार है। अब केवल मशीन आने का इंतजार है। इसके लिए विभाग की ओर से पत्र लिखे जा चुके हैं। हमें मशीन के जल्द ही मिलने की उम्मीद है।
- डॉ. रमेश चंद्रा, कार्यवाहक प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल