सहारनपुर में रामकोविंद। (फाइल फोटो)
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सहारनपुर में देश के सबसे बड़े संवैधानिक पद पर नवनिर्वाचित रामनाथ कोविंद का सहारनपुर से दिल का रिश्ता रहा है। कोविंद एक बार नहीं, बल्कि कई बार यहां आए। लकड़ी की नक्काशी के तो वे मुरीद रहे।
वुडकार्विंग के छोटे-छोटे उत्पाद वे यहां आने के दौरान खुद भी ले जाते थे और समय-समय पर मंगा भी लिया करते थे। देश के सबसे बड़े पद पर चुने जाने के बाद सहारनपुर को उम्मीद है कि वे यहां आएंगे।
अपनी राजनीतिक जीवन के दौरान रामनाथ कोविंद सहारनपुर से जुड़े रहे। उनके सहयोगी रहे राजेन्द्र अटल बताते हैं कि तीन साल पहले रामनाथ कोविंद सहारनपुर के रिमाउंट डिपो में आए थे। उस दौरान रिमाउंट डिपो की छह घोड़ों की बग्घी से यात्रा कराई गई थी।
उस दौरान उनके साथ मौजूद लोगों ने ऐसे ही हल्के माहौल में कहा था कि ऐसी बग्घी तो राष्ट्रपति की होती है। अब जब राष्ट्रपति पद के लिए उनका चुनाव हो गया है तो इसे सहारनपुर से जोड़ा जा रहा है।
राजेन्द्र अटल बताते हैं कि कोविंद हरिद्वार के एक आश्रम से जुड़े हैं और वहां वनवासी बच्चों की पढ़ाई में सहयोग भी करते रहते थे। हरिद्वार जाने के दौरान सहारनपुर जरूर आते थे।
इसके अलावा दलित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहने के दौरान भी यहां उनकी खूब सक्रियता रही है। उधर, राष्ट्रपति चुनाव जीतने पर राजेन्द्र अटल ने अपने सहयोगियों के साथ खुशी जताई। उनका कहना है कि इस जीत से एक नया अध्याय शुरू होगा। इस दौरान गौतम चौधरी, विदुषी, आशु भारद्वाज मौजूद रहे।