मुजफ्फरनगर। फ्रेट रेल कॉरिडोर पर न्यू मंसूरपुर स्टेशन पर अंतरराष्ट्रीय क्षमता से बने बफर स्टॉप को लगाकर मालगाड़ी रोकने का सफल ट्रायल किया गया। विदेशी उपकरणों एवं आधुनिक तकनीक से तैयार बफर स्टॉप ने 6500 मीट्रिक टन वजन की मालगाड़ी रोकने में कामयाबी हासिल की। 11.02 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से दौड़ाई मालगाड़ी को बफर स्टॉप ने जाम कर दिया। एलएंडटी कंपनी के विशेषज्ञों ने इसे तैयार किया है।
डीएफसीसी के लिए भविष्य में फ्रेट कॉरिडोर के स्टेशनों पर शक्तिशाली बफर स्टॉप लगाने का रास्ता साफ हो गया है। दरअसल, रेलवे स्टेशनों पर गाड़ियों को रोकने के लिए लगने वाले बफर स्टाॅप पहले यूरोप से मंगाए जाते थे, जो काफी कम क्षमता के होते है और मंगाने में काफी समय लगता है।
स्टेशनों पर मैन लाइन से कटकर यार्ड या दूसरी लाइन में जाने के लिए डिवाइस के साथ बफर स्टाॅप लगाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। ब्रेक नहीं लगने से बफर स्टॉप रेल को रोकने में अहम भूमिका निभाते है। पहली बार रेल की सुरक्षा की दृष्टि से एलएंडटी ने देश में नई तकनीक इसे डिजाइन किया है।
कंपनी ने बफर स्टॉप का निर्माण अंतरराष्ट्रीय डिज़ाइन विशेषज्ञ एसटीआरई और भारतीय साझेदार एक्मेयून रेल के सहयोग से किया। डिजाइन टीम ने इसे भारतीय रेलवे की भारी मालगाड़ियों और ट्रैक की विशेष परिस्थितियों के अनुरूप परिष्कृत किया। टक्कर लगने के दौरान उत्पन्न भारी बलों को सहन करने के लिए विशेष रूप से सुदृढ़ ट्रैक संरचना विकसित की गई। जो नवाचार की तकनीकी गहराई को दर्शाती है। डीएफसीसीआई के अधिकारी पंकज गुप्ता, डिप्टी सीपीएम कुलदीप, एलएंडटी के अरुण कुमार सिंह, एसके सक्सेना, डॉ. रमन चौधरी, चिंतन पारेख, शुभब्रत साधुखान, इश्तियाक आदि परीक्षण के दौरान मौजूद रहे।
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रेलवे की सुरक्षा में मील का पत्थर: डॉ. रमन
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एलएंडटी के डीजीएम डॉ. रमन चौधरी ने बताया यह परीक्षण न सिर्फ तकनीकी उत्कृष्टता का प्रमाण है, बल्कि भारत अब रेलवे संरचना और सुरक्षा के क्षेत्र में वैश्विक मानकों को चुनौती देने की स्थिति में है। यह पहल भविष्य की रेलवे प्रणालियों को और अधिक सुरक्षित, सुदृढ़ और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। रेलवे सुरक्षा के क्षेत्र में यह एक मील का पत्थर साबित होगा। इसकी क्षमता और ऊर्जा किसी छोटे विमान के टकराने के बराबर मानी जा सकती है।