सहारनपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की योजनाओं पर बजट नहीं मिलने से संकट के बादल मंडराने लगे हैं। गर्भवती महिलाओं की जांच से लेकर टीबी मरीजों को मिलने वाली पोषण राशि तक का बजट नहीं मिला है। रोगी कल्याण समितियों के पास भी बजट का अभाव है। इसी के चलते राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की कई योजनाएं या तो ठप हो गईं या फिर धीमी गति से चल रही हैं। मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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आठ महीने से ई-वाउचर की सुविधा बंद
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत सीएचसी से गर्भवती महिलाओं को निशुल्क अल्ट्रासाउंड के लिए ई-वाउचर जनरेट किए जाते थे। इन ई-वाउचरों से गर्भवती महिलाएं अनुबंध अस्पतालों पर जाकर जांच करा सकती हैं, लेकिन यह सुविधा बजट के अभाव में पिछले करीब आठ महीने से बंद है। गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है।
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टीबी के 6500 मरीज, नौ महीने से पोषण राशि का इंतजार
जिले में करीब 6500 टीबी मरीज हैं, जिनका इलाज चल रहा है। जुलाई 2025 से टीबी मरीजों को पोषण भत्ते की राशि उनके खाते में जारी नहीं हुई है। यानी नौ महीने से मरीज पोषण राशि का इंतजार कर रहे हैं। पोषण राशि नहीं मिलने से टीबी के मरीज परेशान हैं। पोर्टल की समस्या के चलते यह राशि अटकी हुई है।
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रोगी कल्याण समिति का बजट खाली, सालाना बजट पांच लाख
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में रोगी कल्याण समितियों का सालाना बजट पांच लाख रुपये होता है। यह बजट दो किस्तों में मिलता है। साल से अधिक हो गए, लेकिन अभी तक बजट जारी नहीं हुआ है। इसके चलते कहीं जगहों पर निडिल, बीपी ब्लेड, ड्रेसिंग और अन्य आवश्यक चिकित्सा सामग्री की कमी बनी है।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मिलने वाला बजट अभी जारी नहीं हुआ है। प्रयास किए जा रहे हैं कि अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिले। बजट आते ही जारी कर दिया जाएगा।
- डॉ. कुमुद रानी, अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण