वर्ष 2017 में छुटमलपुर के पते पर बने थे प्रमाणपत्र
महाराणा प्रताप कॉलोनी निवासी राहुल सैनी का कहना है कि वर्ष 2017 में उसके छुटमलपुर के पते पर जाति और निवास प्रमाणपत्र बना दिए गए थे, लेकिन अब छुटमलपुर और नानका दोनों जगहों के लेखपालों ने प्रमाणपत्र बनाने से मना कर दिया है। उसे यूपी पुलिस का फार्म भरना है। 28 फरवरी आखिरी तारीख है। प्रमाणपत्रों के अभाव में वह फार्म ही नहीं भर पाएगा।
एक-दूसरे के पास भेज पल्ला झाड़ रहे लेखपाल
इसी कॉलोनी के शुभम धीमान ने बताया कि उसे केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल का फॉर्म भरना है। अंतिम तिथि 4 मार्च है। वह पिछले एक माह से दोनों जगह के लेखपालों के पास चक्कर काट कर थक चुका है। दोनों एक दूसरे के पास भेज कर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।
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नानका के निवासी वे नहीं लगा सकते रिपोर्ट
छुटमलपुर के लेखपाल हरिओम चौहान का कहना है कि महाराणा प्रताप कॉलोनी पड़ोसी गांव नानका के रकबे में बसी है। नानका सदर तहसील का गांव है। ऐसे में उनके प्रमाणपत्र भी सदर तहसील से ही बनेंगे। भले ही उनके पास छुटमलपुर के पते के आधार कार्ड क्यों न हों।
पते का प्रमाण छुटमलपुर का, नानका में कैसे बनाएं निवास प्रमाणपत्र
जयरामपुर उर्फ नानका के लेखपाल अजय कुमार का कहना है कि आवेदन कर्ताओं के पास पते के सभी प्रमाण छुटमलपुर के हैं। ऐसे में यदि वे उनके प्रमाणपत्र साइट पर अपलोड करते हैं तो पता छुटमलपुर तहसील बेहट होने के कारण रिजेक्ट हो जाते हैं। पहले उन्हें अपने आधार कार्ड और अन्य प्रपत्रों में नानका का पता दर्ज कराना होगा।
अभ्यर्थी प्रमाणपत्र बनवाने के लिए अपने मकान की रजिस्ट्री की फोटो कापी लगाएं। जो किराएदार हैं वे मकान मालिक से किए गए एग्रीमेंट की कापी सबमिट करें। ताकि यह जस्टीफाई हो सके कि वे नानका के निवासी हैं। उनके प्रमाणपत्र सदर तहसील से बना दिए जाएंगे।