मीत सरीखी पुस्तकें, दुख सुख में हैं साथ
सहारनपुर। विभावरी सांस्कृतिक समिति की ओर से आयोजित काव्य गोष्ठी में रचनाकारों ने एक से एक उम्दा रचनाएं सुनाकर समां बांध दिया। कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का मनमोह लिया।
बाजार दीनानाथ स्थित बालेश्वर जैन के आवास पर आयोजित काव्य गोष्ठी में हरिराम पथिक ने मीत सरीखी पुस्तकें, दुख सुख में हैं साथ। आंखें बन जाती कभी, कभी थामती हाथ। रचना सुनाकर लोगों का मनमोह लिया। डॉ. बिजेंद्र पाल शर्मा ने गर्दिशों मुझसे दूरी ही रहना, टूट जाओगी आजमाने में, रचना पढ़ी। डॉ. आरपी सास्वत ने नए साल में आओ मिल नव स्वप्न संजोते हैं, दग्ध ह्दय में फूटे फिर करुणा के सोते हैं, रचना सुनाई। विनोद भृंग ने बिगड़ी हुई जो बात है, उसको संवार लें, रोकर नहीं ये जिंदगी, हंसकर गुजार लें, का पाठ किया। आसिफ शम्सी ने अपनी रचना, जहां में फैसले सारे इसी बुनियाद पर होंगे, तेरे आमाल के छींटे तेरी औलाद पर होंगे, सुनाकर समां बांध दिया। इसमें वीरेश त्यागी, फराज अहमद फराज, बालेश्वर कुमार जैन, सुनील जैन राना, नरेंद्र मस्ताना, राजेश गोयल आदि ने भी रचना पाठ किया। इसकी अध्यक्षता जेएन शर्मा ने की। संचालन डॉ. बिजेंद्र पाल शर्मा ने किया। इस दौरान जेके तायल, सत्यप्रकाश त्यागी, विनय रानी जैन, अनिता गोयल, विनीत राय जैन, वीणा सारस्वत आदि रहे।