सहारनपुर। कोई व्यवसाय शुरू करना हो तो उसके लिए तो आपने सिक्योरिटी सुनी होगी, लेकिन क्या आप जानते हैं कि खून में भी सिक्योरिटी का खेल चल रहा है।
महानगर के कुछ ब्लड बैंकों में यह धंधा चल रहा है, जहां या तो आपको खून के बदले डोनर देना पड़ेगा, अन्यथा डोनर का बंदोबस्त होने तक एक निर्धारित रकम सिक्योरिटी के तौर पर जमा करानी पड़ेगी। अमर उजाला ने इसे लेकर महानगर के दो ब्लड बैंकों में जाकर पड़ताल की।
नियमानुसार, प्राइवेट ब्लड बैंक में 1650 रुपये प्रति यूनिट और सरकारी ब्लड बैंक में 1050 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित है। यह राशि ब्लड की प्रोसेस फीस कही जाती है। ब्लड बैंक डोनर के लिए दबाव नहीं डाल सकते और सिक्योरिटी भी नहीं ले सकते। यह होता है फायदा : सिक्योरिटी जमा कराने का यह फायदा होता है कि अगर किसी का मरीज भर्ती है और मोटी रकम खर्च हो रही है तो वह 1600 रुपये वापस लेने के लिए डोनर क्यों तलाश करेगा। ऐसे में सिक्योरिटी की राशि ब्लड बैंक के पास रह जाती है।