सहारनपुर। मन में हिम्मत हो और कुछ कर दिखाने का जज्बा, फिर ऐसा कोई लक्ष्य नहीं जिसे हासिल न किया जा सके। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है नेत्रहीन लवकुश ने। लवकुश ने राष्ट्रीय स्तर पर जूडो में पदक हासिल किए हैं। पैरा ओलंपिक में खेलने का सपना भले ही टूट गया हो, लेकिन उनका हौसला कम नहीं हुआ।
लवकुश मूलतः लखीमपुर खीरी जिले के रहने वाले हैं। वह बचपन में ही भूतेश्वर मंदिर के पास स्थित भारतीय नेत्रहीन विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने आ गए थे। बचपन में बीमारी के चलते अपनी आंखे खो देने वाले लवकुश ने कभी इसे अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया।
उन्होंने जी-तोड़ मेहनत की और अपने सपनों को पूरा किया। ऐसा खेल जिसमें आंखों का सबसे अधिक महत्व माना जाता है, उसमें उन्होंने महारत हासिल की। अपने सपनों को पूरा करने के लिए निरंतर मेहनत की और सफलता के मुकाम को हासिल किया।
लवकुश ने इसी वर्ष यूपी बोर्ड से इंटर की परीक्षा पास की है। उन्होंने इंटर में 70 फीसदी अंक हासिल किए। हाईस्कूल में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा।