सहारनपुर। प्रदेश सरकार द्वारा कांवड़ मार्ग पर ढाबा, होटल, दुकानों, रेस्टोरेंट और ठेलियों पर उनके स्वामी के नाम अंकित करने के निर्देश की भाजपा जनप्रतिनिधियों ने सरहाना की। वहीं, विपक्ष ने इस निर्देश को काला कानून बताया है। वहीं, धर्मगुरुओं ने भी इस पर अपनी राय दी। किसी ने सही बताया तो किसी ने सांप्रदायिक माहौल खराब की साजिश का आरोप लगाया है।
प्रदेश सरकार ने बेहतर कदम उठाया है। ताकि कांवड़ियों को पता लग सके कि वह किसकी ढाबे पर भोजन कर रहे हैं। इसका पता होना चाहिए। क्योंकि पूर्व में विवाद के मामले सामने आए हैं।देवेंद्र निम, विधायक भाजपा रामपुर मनिहारान
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प्रतिष्ठान लिखा होना चाहिए कि स्वामी कौन है। ताकि भ्रम की स्थिति न फैले। प्रदेश सरकार न जनता के हित में ही फैसला लिया गया है।-राजीव गुंबर, भाजपा के नगर विधायक
भाजपा सरकार माहौल खराब करना चाहती है। सांप्रदायिक सौहार्द को खराब करना चाहती है। हमारे हिसाब से तो यह काला कानून की तरह निर्देश हैं। इससे भाई-चारे को ठेस पहुंची है। अली खान, विधायक सपा, बेहट
सरकार के इस निर्देश की निंदा करते हैं। प्रदेश और देश आपसी भाईचारे से चलता है, लेकिन सरकार इसको खत्म करना चाहती है। कांवड़ यात्रा पहले भी होती आई है। इस बार कांवड़ यात्रा मार्ग पर धार्मिक पहचान उजागर करने वाला आदेश तकलीफ पहुंचाने वाला है। इसकी हम निंदा करते हैं।-कारी इसहाक गोरा, संरक्षक जमीयत दावतुल मुस्लिमीन
सरकार ने कुछ सोच-समझकर ही निर्णय लिया है। इस पर राजनीतिक नहीं हो चाहिए। बल्कि सभी को सरकार के निर्देशों का पालन करना चाहिए। प्रतिष्ठान पर उसके स्वामी नाम जरूरत अंकित होना चाहिए।कालेंद्रानंद महाराज, श्री राम-कृष्ण परमहंस के जिला प्रभारी