सहारनपुर। कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में आयोजित चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में मशरूम की उत्तम खेती करने के टिप्स दिए गए। साथ ही मशरूम से विभिन्न उत्पादों को बनाने की भी विस्तार से जानकारी दी गई।
केवीके की ओर से आयोजित प्रशिक्षण शिविर में प्रभारी एवं मशरूम विशेषज्ञ डॉक्टर आईके कुशवाहा ने कहा कि आज के समय में मशरूम सभी के लिए आवश्यक आहार बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसमें मौजूद औषधीय एवं पोषक तत्वों के चलते लगातार बाजार में इसकी मांग बढ़ती जा रही है। बताया कि सफेद बटन मशरूम का उत्पादन अक्तूबर से माह मार्च तक किया जा सकता है। मशरूम की खेती झोपड़ी से लेकर बड़े हॉल तक में आसानी से हो जाती है। वर्ष मेें मशरूम की चार फसलें तक ली जा सकती है। मशरूम की फसल काफी संवेदनशील होती है। इसलिए इसकी देखभाल अच्छे तरीके से होनी चाहिए। उन्होंने सफेद बटन मशरूम, ढींगरी मशरूम, शणितके मशरूम, गनोडरमा, मिल्की मशरूम आदि के उत्पादन के बारे में बताया।
उन्होंने ताजे मशरूम से सब्जी, अचार, मुरब्बा, सिरका और सूखे मशरूम से पापड़, प्रोटीन पाउडर, बाडियां आदि तैयार की तकनीकी जानकारी भी दी। प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. सुखदेव सिंह ने किसानों को मशरूम की उपयोगिता और विपणन के बारे में बताया।
इस दौरान ऋषिपाल, अब्दुल, आकाश, गुलशन, नकुल, रामकुमार, सत्येंद्र, सौरभ, विकास, कपिल, वीरेश त्यागी, मुकेश रानी आदि मौजूद रहे।