सहारनपुर, तीतरों। बरसी की पहचान महाभारत कालीन शिव मंदिर से है। यमुना नदी के किनारे एक टीले पर इस मंदिर का निर्माण कुरुक्षेत्र के युद्ध में भगवान भाेलेनाथ की विशेष कृपा पाने के उद्देश्य से श्री कृष्ण के निर्देश पर कौरवों ने किया था। मंदिर निर्माण के बाद यहां पहुंचे पांडवों में महाबली भीम ने अपनी गदा से मंदिर का मुख्य द्वार पश्चिम दिशा की ओर कर दिया। पूरे भारत में एकमात्र बरसी का शिव मंदिर ही पश्चिममुखी है।
किवदंती है कि महाबली भीम द्वारा श्रीकृष्ण भगवान की स्तुति करने पर यह आशीर्वाद मिला था कि जो भी निसंतान दंपति, नवविवाहित जोड़ा भगवान भोलेनाथ को बेलपत्र, कद्दू व गुड़ की भेली श्रद्धाभाव से अर्पण करेगा, वह संतान और संपन्नता दोनों को प्राप्त करेगा। यहां के ऐतिहासिक महत्व को दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश सरकार ने बरसी मंदिर को पर्यटन स्थल घोषित कर रखा है।
- अंग्रेजों ने किया था हिंदू गांव घोषित
80 साल के ग्रामीण जवान सिंह बताते हैं कि 200 साल पहले बरसी गांव पठान बिरादरी के लोगों का आधिपत्य था। गांव के ही मजरे सुजापुर व फतेहचंदपुर से हिंदू परिवार यहां पर आकर बसे तो पठानों ने इसका विरोध करते हुए सीमा पर लगे ढाक के पेड़ को काट दिया था। इसे लेकर दोनों वर्गों में विवाद हुआ था। अंग्रेज अफसरों ने गांव पहुंचकर धार्मिक स्थल का निरीक्षण कर बरसी को हिंदू गांव घोषित करके एक नेमप्लेट जारी की जो आज भी पुरातत्व विभाग दिल्ली के संग्रहालय में रखी है।
- गांव में था बरगद का हजारों साल पुराना पेड़
ग्रामीण मास्टर विकास कुमार ने बताया कि महाभारतकालीन बरगद का कई हजार साल पुराना एक पेड़ कुछ साल पहले तक गांव में मौजूद था। वह अचानक सूख गया था। उस स्थान को आज भी बड़तला के नाम से पुकारा जाता है।
- चमत्कारी है महात्मा श्याम गिरि महाराज की समाधि की राख
मंदिर पुजारी नरेंद्र गिरि ने बताया कि उनके पूर्वज महाभारतकाल से ही यहां पूजा अर्चना करते चले आ रहे हैं। करीब 200 साल पूर्व मंदिर में भगवान भोलेनाथ की स्तुति करने वाले संत महात्मा श्याम गिरि महाराज की यहां समाधि है। यदि कोई गाय, भैंस दूध निकालने के दौरान तंग करती है तो समाधि के धुने की राख लगाने से पशु ठीक हो जाता है। बाद में पशुपालक पशु के दूध से बनी खीर का प्रसाद भगवान भोलेनाथ व बाबा की समाधि पर अर्पित करते हैं।
- पूरे उत्तर भारत से आते हैं श्रद्धालु
ग्राम प्रधान आदेश कुमार का कहना है कि उनके गांव की दूसरे राज्यों में भी पहचान शिव मंदिर से है। यहां पूरे उत्तर भारत से श्रद्धालु बाबा के दर्शनों को पहुंचते हैं। उनका प्रयास है कि मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो।