सहारनपुर में नोट बदलने और 500 और 1000 का पुराना नोट बैंकों में जमा कराने के लिए शुक्रवार को दिनभर मारामारी मची रही। कई बैंकों पर लोगों ने हंगामा भी किया। आलम यह रहा कि कई बैंकों में सौ के नोट खत्म हो गए, जिसकी वजह से उपभोक्ताओं को निराश होकर लौटना पड़ा।
केंद्र सरकार द्वारा 500 और 1000 के नोट बंद करने के बाद बृहस्पतिवार को पहली बार बैंक खुले थे, जिनमें पुराने नोट जमा कराने और नोट बदलने के लिए भीड़ उमड़ी थी। उम्मीद थी कि शुक्रवार को भीड़ कुछ कम रहेगी, मगर इसका उलटा हुआ।
शुक्रवार की सुबह सात बजे से ही बैंकों के बाहर लोगों की कतार लगना शुरू हो गई थी। बैंक कर्मी सुबह दस बजे बैंक पहुंचे। इन तीन घंटे में कतार में लगे लोगों के बीच कई बार धक्का मुक्की और हाथापाई तक हो चुकी थी।
कराता रोड स्थित एसबीआई की ब्रांच में व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस के सामने भी लोग भिड़ते नजर आए। कोर्ट रोड स्थित एसबीआई की मेन ब्रांच में बृहस्पतिवार को आराम से लेनदेन हुआ, मगर शुक्रवार को बैंक के बाहर करीब 15 मीटर की लाइन लगी थी, जो दिनभर लगी रही।
मिशन कम्पाउंड स्थित पंजाब नेशनल बैंक में भी दिनभर मारामारी मची रही। शारदानगर रोड स्थित एक्सिस बैंक में दोपहर एक बजे तक सौ के नोट खत्म हो चुके थे। इसी प्रकार अन्य बैंकों की हालत भी रही, जहां से अनेक उपभोक्ताओं को बैरंग लौटना पड़ा।
मानकमऊ स्थित एक ब्रांच के शाम चार बजे बंद कर दिए जाने से बाहर कतार में खड़े सैकड़ों लोगों ने हंगामा कर दिया। अभी रुपये जमा कराने और बदलने के लिए कम से कम सोमवार तक ऐसा ही हाल रहने की आशंका है।
रामपुर मनिहारान / चिलकाना / छुटमलपुर/ लखनौती/ गंगोह में पांच सौ और एक हजार रुपये के पुराने नोट बंद होने के बाद दूसरे दिन भी बैंकों में नोट बदलने को लेकर मारामारी रही।
रामपुर मनिहारान और गंगोह में जहां दो महिलाएं अफरातफरी में घायल हो गई। लखनौती में पहले नोट लेने के विवाद में दो युवकों के बीच मारपीट हो गई। ज्यादातर जगहों पर पुलिस को बैंकों में बुलवा कर स्थिति संभालनी पड़ी।
वहीं बैंक अधिकारियों का कहना है कि आपाधापी में लोग बन रहे एक दूसरे के लिए मुसीबत बन रहे हैं। नोट जमा करने के लिए अभी काफी समय है। रामपुर मनिहारान के पीएनबी, एसबीआई, शिवालिक बैंक में बैंक खुलने से पूर्व ही गेट पर ग्राहकों की लंबी लाइनें लग गई थी।
बैंक खुलते ही ग्राहकों द्वारा एक हजार व पांच सौ के नोट जमा कराने की भीड़ बैंक के अंदर जा घुसी जिससे पूरी व्यवस्था चौपट हो गई। कुछ लोग इस दौरान नीचे भी गिर गए। एक महिला भी लोगों के पैरों तले आने से चोटिल हो गई।
उसका उपचार निजी चिकित्सक के यहां कराया गया। स्थिति को बिगड़ती देख शाखा प्रबंधकों को पुलिस की मदद लेनी पड़ी। पीएनबी व एसबीआई के एटीएम पर ताले लगे रहे जिसके चलते यहां से भी लोगों को निराशा रही।
चिलकाना में नोट जल्दी से लेने के चक्कर में आपस में ही भिड़ गए। कस्बे में एसबीआई, पीएनबी तथा यूको बैंक के बाहर भारी भीड़ होने से जाम लगा रहा। पुलिस ने लोगों को समझा कर जाम खुलवाया।
लोगों को तीन-तीन काउंटर होने के बावजूद लोगों को कई-कई घंटे लाइन में लगाना पड़ा। जहां बैंकों में लोगों की भीड़ लगी रही। वहीं डाकघर में नाम मात्र को ही लोग लेन देन के लिए पहुंचे।
छुटमलपुर में दूसरे दिन भी सभी बैंक शाखाओं पर नोट बदलने के लिए मारामारी रही। बैंकों के बाहर तक लाइनें लगी रही। हालांकि दोपहर के बाद ज्यादातर बैंकों में नोट खत्म हो गए और लोगों को मायूस हो कर वापस लौटना पड़ा।
एटीएम मशीनें न चलने के कारण भी खासी परेशानी हो रही है। लखनौती में बैंक में नोट बदलने को लेकर लगी लाइन में लगे युवकों में मारपीट हो गई। मारपीट इतनी बढ़ी की सड़क पर जाम लगने के साथ ही वहां अव्यवस्था फैल गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामले को संभाला।
गंगोह नगर और देहात की बैंक शाखाओं में बंद करेंसी के नोट बदलने और जमा करने को लेकर शुक्रवार को भी मारामारी मची रही। बैंकों के बाहर सुबह से शाम तक लंबी लाइनें लगी रही। कई बीमार और वृद्ध लोगों को भी स्वयं ही इन कतारों में लगना पड़ा।
कई घंटे खड़े रहने के चलते एक महिला अचानक चक्कर खाकर सड़क पर गिर पड़ी। अन्य लोगों ने उसे उठाया। महिला को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
कार्ड के दर्जनो खाते जो वर्षों से बंद चल रहे थे, अचानक पुनर्जीवित हो उठे है। वे किसान जिन्होंने केसीसी से पैसा निकालने के बाद बैंक की ओर मुड़ कर नही देखा और रुपये ना जमा कराकर बैंक अधिकारियों को परेशान कर दिया था, वे बैंकों में आकर खातों का पुनर्जीवित करने के तरीके पूछ रहे है। एक प्रबंधक ने बताया कि घाटे में चल रही अनके शाखाएं लाभ की स्थिति में पहुंच जाएगी।
दूसरे दिन भी सूने रहे बाजार
सरसावा। केंद्र सरकार द्वारा 500 और एक हजार के पुराने नोट बंद करने की घोषणा का असर बाजार पर हावी रहा। शुक्रवार को भी बाजार ग्राहकों से खाली रहे। व्यापार मंडल के अध्यक्ष महावीर गुप्ता तथा व्यापारी मोहन गोयल, मदन सिंघल, प्रवीण जुनेजा, अरविंद भाटला आदि ने बताया कि नोट बंद होने की घोषणा का बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
उधर शुक्रवार को बैंकों के बाहर नोट बदलने तथा खाते में पैसा जमा कराने वालों की भीड़ रही। भीड़ के कारण फैली अव्यवस्था को थाना पुलिस ने लोगों को समझा कर व्यवस्था संभाली।