सहारनपुर में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी योजना के दूसरे चरण के टॉप शहरों में स्थान पाने के लिए सहारनपुर ने फिर से कवायद शुरू कर दी है।
योजना से जुड़े अधिकारियों ने शहर के विकास का खाका तैयार कर लिया है। मगर शहर के मौजूदा हालात पर नजर डालें तो तैयार किए गए खाके के अनुरूप विकास कर पाना आसान नहीं होगा।
अतिक्रमण स्मार्ट सिटी की राह का सबसे बड़ा रोड़ा माना जा रहा है। शहर भर में स्थापित ज्यादातर थाने और पुलिस चौकियां सड़कों पर बनी हैं। इनकी शुरूआत हसनपुर पुलिस चौकी, कलक्ट्रेट पुलिस चौकी, कुतुबशेर थाना, नुमाइश कैंप चौकी, देहात कोतवाली, चिलकाना रोड चौकी पूरी तरह से सड़क पर बने हैं, जो वर्षों से यातायात में बाधा बने हुए हैं।
इन्हें सड़कों से हटाकर कहीं अन्य जगह पर शिफ्ट करा पाना आसान नहीं रहेगा। इसके अलावा शहर भर की सड़कों पर स्थाई और अस्थाई अतिक्रमण फैला हुआ है, जिसे हटाने में प्रशासन हमेशा नाकाम साबित रहा है।
स्मार्ट सिटी में शत प्रतिशत नागरिकों को पानी के कनेक्शन दे पाना भी आसान नहीं होगा। वर्तमान में मुश्किल से 21 फीसदी घरों में ही नगर निगम की ओर से पानी सप्लाई किया जा रहा है, जबकि 79 फीसदी नागरिक अवैध रूप से पानी का दोहन कर रहे हैं।
योजना के तहत प्रत्येक घर में पानी की दो लाइन पहुंचाई जाएंगी, जिनमें एक में शुद्ध जल होगा, जो पीने के काम आएगा और दूसरी में अन्य कार्यों के लिए साधारण पानी मिलेगा। शहर के बीच से होकर गुजरने वाले भारी वाहन यातायात में बड़ी समस्या पैदा कर रहे हैं।
भारी वाहनों को शहर में एंट्री करने से रोकने के लिए एक अलग से रिंग रोड की स्थापना करनी होगी, जो एक या दो साल में निपटने वाला काम नहीं है। साथ ही इस पर लागत भी अधिक आएगी। चौथी बड़ी समस्या शहर में काटी जा रही अवैध कॉलोनियों और अवैध भवनों की रहेगी।
सहारनपुर की परंपरा बन चुकी है कि यहां कॉलोनाइजर पहले कॉलोनी काटते हैं, जिसके बाद एसडीए उन्हें अप्रूव्ड करता है। जबकि नियमानुसार पहले अप्रूवल होनी चाहिए। यही वह समस्याएं हैं, जो स्मार्ट सिटी की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बनने वाली हैं।
स्मार्ट सिटी योजना के तहत दूसरे चरण में सहारनपुर के चयन के लिए प्रयास जारी हैं। जन सहभागिता के लिए कार्यशाला कर समाज के अलग-अलग वर्ग से सुझाव लिए गए हैं। प्रयास यही रहेगा कि सहारनपुर को चुनिंदा शहरों में स्थान मिले।
-डॉ. नीरज शुक्ला, नगरायुक्त।