सहारनपुर। मनरेगा का नाम बदलकर केंद्र सरकार ने नया कानून वीबी जीरामजी लागू किया है। मनरेगा में पंजीकृत सभी श्रमिकों को ई-केवाईसी जरूरी है। अब चेहरा दिखाकर हाजिरी लगेगी। इसके बाद श्रमिकों को मजदूरी मिलेगी।
नया कानून वीबी जीरामजी( विकास भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण) के लागू होने से पहले सभी श्रमिकों की ई-केवाईसी कराई जा रही है। कानून में पारदर्शिता बनी रही इसके लिए यह प्रक्रिया लागू की गई है। नए कानून में इसकी व्यवस्था की गई है। इसके तहत पंजीकृत श्रमिकों की फेस कैप्चर किया जा रहा है। सॉफ्टवेयर में अपडेट होने के बाद सभी श्रमिकों को फेस डिटेक्शन होने के बाद मजदूरी दी जाएगी। इसके लिए जिलेभर के गांवों में जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
श्रमिकों के साथ प्रधानों एवं अन्य लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जिले में मनरेगा के तहत पंजीकृत श्रमिकों की संख्या करीब 1.05 लाख है। इनमें से अभी तक 75 फीसदी मतलब 79641 श्रमिकों की ई-केवाईसी पूरी हो चुकी है। गांव-गांव में रोजगार सेवक मनरेगा जॉब कार्ड धारकों की फेस स्कैनिंग और फिंगर प्रिंट स्कैन कर ई-केवाईसी अपडेट कर रहे हैं। जनपद में लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक 75 फीसदी केवाईसी हो चुकी है। शत प्रतिशत लक्ष्य को पूरा करने के लिए श्रमिकों को भी जागरूक किया जा रहा है।
- ई-केवाईसी न कराने वाले श्रमिकों को नहीं मिलेगा काम
मनरेगा जॉब कार्ड धारकों की ई-केवाईसी कराई जा रही है। वीबी जीरामजी कानून के तहत ई-केवाईसी न कराने वाले श्रमिकों को काम नहीं दिया जाएगा। रोजगार सेवकों को भी सभी पंजीकृत श्रमिकों की ई-केवाईसी कराने के निर्देश दिए गए हैं।
वर्जन
पंजीकृत सभी श्रमिकों की ई-केवाईस कराई जा रही है। ई-केवाईसी न कराने वाले श्रमिकों को मजदूरी नहीं मिल सकेगी। अभी तक 75 फीसदी से अधिक श्रमिकों का सत्यापन हो चुका है।
- प्रणय कृष्ण, प्रभारी उपायुक्त श्रम रोजगार