एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए बांग्लादेशी पिता-पुत्र के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल (सीडीआर) खंगालने पर कई संदिग्ध नंबर मिले हैं। जिसके आधार पर माना जा रहा है कि एटीएस फिर से सहारनपुर में सदिग्ध लोगों की धरपकड़ कर सकती है, जो बांग्लादेशी पिता पुत्र के संपर्क में थे। वहीं, स्थानीय पुलिस और खुफिया टीमें भी सक्रिय हो गई हैं। इन दोनों आरोपियों के स्थानीय नेटवर्क को तोड़ने के लिए पुलिस ने भी तैयारी की हैं।
तीन दिन पूर्व ही एटीएस ने महानगर से बांग्लादेशी तनवीर और उसके पिता उमर मोहम्मद उस्मान को गिरफ्तार किया था, जो 1994 से सहारनपुर में ठिकाने बदल बदलकर रह रहे थे। इन्होंने भारतीय नागरिकता के तमाम दस्तावेज भी बनवाए हुए थे। इनके पास से बांग्लादेश का पहचान पत्र मिला था। एटीएस की जांच में सामने आ चुका है कि दोनों पिता-पुत्र बांग्लादेशियों और रोहिंग्या को वेस्ट यूपी के अन्य जिलों में लाकर बसाने में जुटे थे। इसके बदले प्रत्येक व्यक्ति से 40 से 50 हजार रुपये तक लेते थे।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक एटीएस ने आरोपियों की कॉल डिटेल खंगाली तो कई संदिग्ध नंबर मिले हैं। इन नंबरों को जो लोग इस्तेमाल कर रहे हैं, उनको तलाशा जा रहा है। आशंका है कि यह लोग भी बांग्लादेशी हो सकते हैं, जो अवैध रूप से सहारनपुर सहित आसपास के जिलों में रहे हैं। क्योंकि, दोनों आरोपियों के संपर्क में यह लोग ज्यादा रहे हैं।
एसएसपी डाक्टर एस चनप्पा का कहना है कि एटीएस लखनऊ द्वारा मामले में कार्रवाई की जा रही है। जिले में कोई बांग्लादेशी अवैध रूप से तो नहीं रह रहा है, इसका पता लगाया जा रहा है।
खुफिया टीम जुटा रही डाटा
बांग्लादेशी पिता-पुत्र के पकड़े जाने के बाद खुफिया टीमों ने यहां रह रहे बांग्लादेशियों का डाटा जुटाना शुरू कर दिया है। हालांकि, अभी यह पता नहीं चला है कि यह लोग अवैध रूप से रह रहे हैं या फिर वैध तरीके भारत आए हैं, लेकिन एहतियात के तौर पर एलआईयू और पुलिस सक्रिय है।
किस-किस ने की मदद, हो रहे चिंहित
आरोपियों ने भारतीय नागरिकता के तमाम दस्तावेज बनवा रखे थे। इसमें आरोपियों की किस-किस ने मदद की है। इस बिंदु पर भी जांच शुरू हो गई है। सूत्र बताते हैं कि पुलिस और खुफिया टीम इन सब लोगों का डाटा जुटाकर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है।