देवबंद। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के हालिया बयान पर गहरी चिंता जताई है। मौलाना मदनी ने कहा कि इस प्रकार के वक्तव्य न केवल खुले तौर पर हिंसा और नफरत को बढ़ावा देने वाले हैं, बल्कि वे भारत के लोकतांत्रिक और सांविधानिक ढांचे पर सीधा हमला है।
मौलाना महमूद मदनी ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि किसी विशेष समुदाय को भयभीत करना, उसके मताधिकार को छीनने की धमकी देना और उसके खिलाफ आर्थिक शोषण को प्रोत्साहित करना खुले फासीवाद और सामूहिक दंड की मानसिकता को दर्शाता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी सोच किसी भी सभ्य, लोकतांत्रिक और सांविधानिक व्यवस्था में पूरी तरह अस्वीकार्य है। मौलाना मदनी ने कहा कि इन बयानों को मात्र राजनीतिक बयानबाजी या चुनावी रणनीति मानकर नजरअंदाज करना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों से समझौता करने के समान होगा।
मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि इस प्रकार के बयान एक समुदाय के विरुद्ध खुले तौर पर हिंसा को वैध ठहराने का प्रयास है, जिससे पूरे लोकतांत्रिक ढांचे की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
मौलाना मदनी ने सभी सांविधानिक संस्थाओं, विशेष रूप से निर्वाचन आयोग, न्यायपालिका और नागरिक समाज से अपील की कि वे मूक दर्शक बने रहने के बजाए अपने सांविधानिक दायित्वों का निर्वहन करें ताकि नफरत, विभाजन और भय की राजनीति करने वालों को समय रहते रोका जा सके। उन्होंने मांग की है कि इस तरह के भड़काऊ और विभाजनकारी बयानों पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।