फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Saharanpur News: बड़ी संपत्तियों के कर निर्धारण में खेल की आशंका, ऑडिट से बच रहा विभाग

विज्ञापन
विज्ञापन
- नगर आयुक्त के निर्देशों को किया जा रहा नजरअंदाज, कार्रवाई का डर नहीं
विज्ञापन


संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। नगर निगम का गृहकर एवं जलकर अनुभाग कर निर्धारण और उससे संबंधित अभिलेख मुख्य नगर लेखा परीक्षक को उपलब्ध नहीं करा रहा है। इसकी वजह से ऑडिट आपत्ति लगी है। नगर आयुक्त शिपू गिरि चेतावनी भी दे चुके हैं कि यदि अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं तो माना जाएगा कि किसी गंभीर अनियमितता को छिपाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। उसके बाद भी अधिकारी मनमानी पर अडिग हैं। अब नगर आयुक्त की ओर से अंतिम बार चेतावनी भरा पत्र लिखा गया है।

महानगर में आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों के कर निर्धारण के लिए जीआईएस (ज्योग्राफिकल इंफॉर्मेशन सिस्टम) सर्वे कराया गया है, लेकिन उसमें बरती गई लापरवाही के कारण अनेक लोगों के घरों और प्रतिष्ठानों का टैक्स कई गुणा तक बढ़ा दिया गया। इसका विरोध होने और आपत्तियां आने के बाद नगर निगम को स्वकर निर्धारण प्रणाली अपनानी पड़ी। अनेक लोगों ने स्वकर प्रपत्र भरकर खुद अपना टैक्स सही या कम कराया है।
विज्ञापन

विभागीय सूत्रों ने बताया कि कुछ विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने सेटिंग कर अनेक व्यावसायिक भवनों के टैक्स लाखों से हजारों रुपये में कराए हैं। शायद यही वजह है कि विभागीय अधिकारी कर निर्धारण के अभिलेखों का ऑडिट कराने से बच रहे हैं। मुख्य नगर लेखा परीक्षक कई बार अभिलेख उपलब्ध कराने को कह चुके हैं। अभिलेख नहीं मिलने पर उनको नगर आयुक्त शिपू गिरि को पत्र लिखना पड़ा है।
विज्ञापन

नगर आयुक्त शिपू गिरि ने दो दिन पहले 21 अगस्त को फिर से मुख्य कर निर्धारण अधिकारी को पत्र लिखकर अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले भी नगर आयुक्त पत्र लिख चुके हैं, जिसमें चेतावनी दी गई थी कि यदि अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं तो इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए संबंधित के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई कराई जाएगी। साथ ही समझा जाएगा कि किसी विशेष अनियमितता को छिपाने की मंशा से ऐसा किया जा रहा है। उसके बावजूद अभिलेख ऑडिट के लिए नहीं भेजे गए। अब नगर आयुक्त ने इसे गंभीर प्रशासनिक शिथिलता, उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना और लेखा परीक्षा कार्य में सहयोग न करने की स्थिति माना है। 24 अगस्त तक अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने पर संबंधित के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन से करने की चेतावनी दी है।
जीआईएस सर्वे के आधार पर संपत्तियों की संख्या
कुल संपत्ति-2.13 लाख
आवासीय संपत्ति1.43 लाख
व्यावसायिक संपत्ति38 हजार
अन्य संपत्तियां33 हजार
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें