अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सरकार पर अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए पल्स पोलियो अभियान जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के बहिष्कार का एलान किया है। उन्होंने मांगें माने जाने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी। मंगलवार को गंगोह विधायक ने भी धरनास्थल पहुंचकर उनके आंदोलन को समर्थन दिया।
महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ के बैनर तले पिछले 12 दिन से आंगनबाड़ी हड़ताल पर हैं। मंगलवार को भी तमाम कार्यकर्ता हकीकतनगर स्थित रामलीला मैदान पर इकट्ठा हुईं। धरनास्थल पर पहुंचे गंगोह विधायक प्रदीप चौधरी ने उनकी मांग को जायज ठहराते हुए उनकी सभी 17 मांगों को विधान सभा में उठाने का आश्वासन दिया।
जिलाध्यक्ष सुलेलता पंवार ने कहा कि प्रदेश सरकार कुंभकर्णी नींद सो रही है, जिसे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आंदोलन नजर नहीं आ रहा है। जिला महामंत्री पूनम शर्मा ने कहा कि मांग माने जाने तक आंगनबाड़ी पल्स पोलियो अभियान, बीएलओ ड्यूटी और सरकार के सभी ऐसे कार्यों में सहयोग नहीं करेंगी।
इस दौरान सुमनलता, सुधा, गीता, अर्चना, पारुल, तसनीम, लोकेश देवी, पुष्पा, ऊषा, पिंकी, अनिता, मीना, कुसुम, अंजुल, संजीता, बेबी, रागिनी, रेनुका, रॉकी भाटी, सुनीता शर्मा, विनीता, अनुपमा, निशा, रीता, निर्मला आदि थीं।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांग
राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
कर्मचारी का दर्जा मिलने तक कार्यकर्ता को 18 हजार और सहायिका को नौ हजार रुपये मानदेय दिया जाए।
कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को क्रमश: 200 और सौ रुपये की प्रतिवर्ष वृद्धि की जाए।
कार्यकर्ताओं को योग्यता के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में समायोजित किया जाए।
कार्यकर्ता एवं सहायिका को जून में एक महीने का अवकाश दिया जाए।
मानदेय को मनमाने ढंग से रोकना और काटना बंद किया जाए आदि।