ऐसे बनाया जा रहा गोमूत्र से अर्क
गोमूत्र को एक बड़े टैंक में इकट्ठा किया गया है। वहां से पाइप के जरिये ड्रम तक पहुंचाया जाएगा। जिसे इलेक्ट्रिकली गर्म कर फिर ड्रम से गोमूत्र को कांच के बड़े फ्लास्क में पहुंचाया जाता है, जो विद्युत संचालित है। इस तक पहुंचने में गोमूत्र को फिल्टर भी किया जाता है। फिर भी एक निश्चित ताप पर उबाला जाता है, जिसके बाद फ्लास्क से उठने वाली वाष्प कांच की नलियों के जरिये कांच के पात्र में अर्क के रूप में बूंद-बूंद इकट्ठा हो जाती है।
फिनायल बिक्री का रोडमैप भी तैयार
पतंजलि को भी फिनायल की बिक्री की जा सकती है। वहीं, योग गुरु स्वामी रामदेव को भी नगर आयुक्त इस प्रोजेक्ट के बारे में बता चुके हैं और स्वामी रामदेव ने सहारनपुर आकर इस प्रोजेक्ट को देखने की बात कही है।
गोमूत्र और गोबर से करीब 22 तरह के उत्पाद बन सकते हैं। गोमूत्र से अर्क बनाने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसे शहर की सभी गोशाला में स्थापित कराया जाएगा। गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह कार्य किया जा रहा है।
- ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त, नगर निगम
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