संवाद न्यूज एजेंसी
छुटमलपुर। नगर पंचायत छुटमलपुर में विकास कार्यों की अनदेखी और अधिशासी अधिकारी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा मुख्यमंत्री के जनता दरबार में त्यागपत्र देने वाले सभासद बैकफुट पर आ गए हैं। चार त्यागपत्रों पर शासन द्वारा संज्ञान लिए जाने पर संबंधित सभासदों ने डीएम कार्यालय पहुंच अपने त्यागपत्र वापस ले गए। उनका दावा है कि आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने त्यागपत्र वापस लिए हैं।
बता दें कि नगर पंचायत छुटमलपुर के 10 सभासदों ने 19 जनवरी को लखनऊ पहुंच अपने त्यागपत्र सौंपने का दावा किया था। सभासदों ने नगर पंचायत प्रशासन पर विकास कार्यों में भागीदारी से वंचित रखने और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हए स्वेच्छा से त्यागपत्र देने की बात कही थी। सभासदों द्वारा दिए गए त्यागपत्रों में से चार को शासन ने मंडलायुक्त सहारनपुर को भेजा था। एडीएम प्रशासन कार्यालय से अग्रिम कार्रवाई के लिए वार्ड पांच की रेशमा, वार्ड आठ की दिलजहां, वार्ड 12 के नवाब और वार्ड 13 के आदिल के त्यागपत्रों की प्रतियां नगर पंचायत चेयरपर्सन शमा परवीन को भेज दी थी।
चेयरपर्सन द्वारा इन्हें तामील करते हुए आवश्यक कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को प्रेषित कर दिया गया था। दस में से चार ही सभासदों के त्यागपत्रों पर कार्रवाई शुरू होने को लेकर सभी दस सभासद डीएम से मिले थे। वहां उन्होंने अपनी समस्या उनके समक्ष रखी और त्यागपत्र देने की वजह भी बताई।