अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कैंपस में ही शुक्रवार को हुए जानलेवा हमले में शहर के बेटे आलम गीर का शरीर गोलियों की बौछार से छलनी-छलनी कर दिया गया। उस पर माउजर से करीब 10 गोलियां मारी गईं। इनमें से आठ गोलियों के गहरे निशान उसके शरीर पर साफ नजर आए।
एमएयू में आलमगीर की मौत का पता चलते ही यहां अजीज कालोनी के पास वर्धमान कॉलोनी स्थित घर में कोहराम मच गया। सुबह शव पहुंचते ही आसपास के लोगों से लेकर नेताओं और अधिकारियों का तांता लग गया। जानलेवा हमले के बावजूद परिजनों की ओर से पोस्टमार्टम नहीं कराया गया और दोपहर एक बजे उसका जनाजा निकला। जनाजे में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा।
बता दें कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में बीएसडब्ल्यू (बैचलर इन सोशल वर्क) के छात्र आलमगीर पर शुक्रवार को हेलमेट पहने बाइक सवारों ने कैंपस में ही माउजर से गोलियां बरसाकर हमला किया। इससे उसकी मौत हो गई। आलमगीर शहर के चिलकाना रोड स्थित वर्धमान कॉलोनी का ही रहने वाला था।
उसकी मौत की खबर मिलते ही यहां घर में कोहराम मच गया। आलमगीर के पिता शमीम और भाई शाह आलम ने बताया कि शुक्रवार दोपहर बाद तीन बजे उन्हें भाई के बारे में सूचना मिली थी।
इसके बाद रात 12 बजे तक वे लोग अलीगढ़ पहुंचे थे और शनिवार सुबह दस बजे तक यहां शव लेकर पहुंचे। उन्होंने माना कि आलम की हत्या की गई है। लेकिन वालिद शमीम पोस्टमार्टम और कानूनी कार्रवाई कराने को तैयार नहीं हुए।
बाएं हिस्से पर लगी सबसे अधिक गोलियां
आलमगीर का शव जब यहां पहुंचा तो उसके शरीर पर गोलियों के जख्म देखकर हर कोई हैरान रह गया। शाह आलम और कुछ अन्य लोगों ने बताया कि मोटे तौर पर आठ गोलियों के निशान दिखाई दिए हैं।
इनमें एक दिल में, दो सिर में और बाकी गोलियां शरीर के बायीं ओर पेट से नीचे कूल्हे तक लगी हैं। सबसे ज्यादा गोलियां बाएं हिस्से में ही लगी हैं।
जालिमों ने छलनी-छलनी कर दिया हमारा बेटा
आलम का शव पहुंचने के बाद उसके जनाजे से पहले परिवार को सांत्वना देने पहुंचे सपा नेता सरफराज खान, कांग्रेस के पूर्व विधायक इमरान मसूद, नरेश सैनी, फिरोज आफताब सहित अन्य नेताओं ने वालिद शमीम, छोटे भाई शाह आलम, बड़े भाई जहांगीर सहित अन्य परिजनों को सांत्वना दी।
इनसे बातचीत के दौरान वालिद शमीम ने कहा कि उनका बेटा छलनी-छलनी कर दिया। इतनी गोलियां मारी है कि जिंदगी बचने का कोई मौका ही नहीं दिया।
हमारे भाई की नहीं थी किसी से दुश्मनी
आलमगीर के भाई शाह आलम और जहांगीर सहित अन्य परिजनों ने कहा कि इतनी बेरहमी से गोलियों की ताबड़तोड़ बौछार कर हमला क्यों किया गया। इसका अभी पता नहीं चला है।
उन्होंने दावा किया कि हमारे भाई की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। यूनिवर्सिटी में ही किसी के साथ कुछ हुआ हो। इसकी उन्हें खबर नहीं है।
एसएसपी बोले, मर्डर हुआ तो पोस्टमार्टम तो कराओ
आलमगीर का जनाजा उठने से पहले घर पर पहुंचे एसएसपी नितिन तिवारी और नगर आयुक्त डा. नीरज शुक्ला ने भी वालिद से कहा कि वे बेटे की हत्या होने की स्थिति में पोस्टमार्टम करवाएं और इसकी कानूनी जांच कराएं।
लेकिन वालिद नहीं माने। एसएसपी ने वालिद और अन्य लोगों को एक साइड ले जाकर यहां तक कहा कि यदि सहारनपुर में ही पोस्टमार्टम करवाना चाहते हो तो यहां करा देंगे, लेकिन तमाम जद्दोजहद के बावजूद वालिद इसके लिए तैयार नहीं हुए। यहां उमड़े हुजूम में अधिक लोगों को इस बात का मलाल रहा कि बेटे की मौत के जिम्मेदार लोगों पर कानूनी कार्रवाई नहीं कराई जा रही है।
पढ़ाई के बाद थी निकाह की तैयारियां
एएमयू के छात्र आलमगीर की यहां पढ़ाई पूरी करते ही निकाह की तैयारियां की जा रही थी। घर के कुछ करीबी लोगों ने बताया कि जहांगीर के बाद आलम दूसरे नंबर का बेटा था। उससे छोटा है शाह आलम। तीनों भाइयों में अब सिर्फ दो ही बचे हैं।