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चार साल बाद हटा माथे से बिजली चोरी का कलंक

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सहारनपुर। विद्युत निगम के अधिकारियों की गलती से एक उपभोक्ता के माथे पर चार साल तक विद्युत चोरी करने का कलंक लगा रहा। मामला न्यायालय में पहुंचा तो विद्युत निगम के साथ ही पुलिस द्वारा विवेचना भी कटघरे में आ गई। विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट एवं अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या 04 सुभाष चंद्रा के न्यायालय ने इसमें फैसला सुनाते हुए उपभोक्ता को बरी कर दिया और विद्युत निगम पर 25 हजार रुपये अर्थदंड लगाया है।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता विक्रम सिंह के मुताबिक विद्युत निगम के अवर अभियंता अभय कुमार सिंह और उनकी टीम नौ नवंबर 2016 को बेहट क्षेत्र के गांव कलसिया में उपभोक्ता जगपाल सिंह के मकान पर चेकिंग को पहुंची थी। इसके बाद 12 जनवरी 2017 को बेहट कोतवाली में दर्ज कराई, जिसमें जगपाल को बकायेदारी में कनेक्शन कटने के बावजूद चोरी से बिजली उपभोग करने का आरोपी बनाया गया। पुलिस उपनिरीक्षक बिजेंद्र सिंह ने इसकी विवेचना की और चार्जशीट अदालत में दाखिल की। फिर अदालत में बचाव पक्ष की तरफ से तथ्य पेश किए और बताया कि जिस विद्युत कनेक्शन नंबर पर बकायेदारी और चोरी से बिजली उपभोग करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है, उस नंबर का कनेक्शन जगपाल के पास है ही नहीं। बिजली चोरी की रिपोर्ट भी चेकिंग के दो महीने बाद दर्ज कराई गई। सहायक शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि 25 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। यह रकम एक माह के भीतर जगपाल को अदा की जाएगी। इसके अलावा दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई करने पर विद्युत निगम के एसडीओ अभय कुमार सिंह और विवेचना करने वाले पुलिस उपनिरीक्षक बिजेंद्र सिंह के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
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इससे पहले एक किसान को किया गया था बरी
सहारनपुर। विद्युत चोरी के आरोप में निर्दोष को फंसाने का यह दूसरा मामला है। इससे पहले नकुड़ क्षेत्र के एक किसान को भी विद्युत चोरी में नामजद कर दिया गया था। उस मामले में तीन साल बाद गत 19 मार्च को ही न्यायालय ने फैसला सुनाकर किसान को बरी करने के साथ ही विद्युत निगम पर 10 हजार रुपये अर्थदंड लगाया था।
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