सहारनपुर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने अपहरण के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज की है। आरोपी मेहरबान ने अदालत में याचिका दाखिल की थी।
वादी ने थाना मंडी में तहरीर दी थी। बताया कि वह एक मजदूर है। वह और उसके लड़के अन्य राज्य में मजदूर करते हैं। बताया कि घर में उसकी लड़की और पत्नी थी। आरोप लगाया कि मेहरबान उसकी बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। काफी तलाश करने के बाद भी उसकी बेटी का कुछ पता नहीं चला तो प्राथमिकी दर्ज कराई गई। उधर, जमानत के लिए मेहरबान ने अदालत में याचिका दाखिल की।
दलील दी कि प्रथम सूचना रिपोर्ट देरी से कराई गई है। बताया कि वह दोनों आपस में एक-दूसरे को जानते व पहचानते हैं। दोनों ने रीति-रिवाज से विवाह कर लिया है और दोनों के बच्चे बड़े भी हो चुके हैं। वह अपनी पत्नी के साथ दिल्ली में रहते थे। अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध किया। दलील दी कि मामला पुराना है, लेकिन आरोपी की अनुपस्थिति के कारण 22 वर्ष बाद भी पत्रावली में कमिटल की कार्रवाई नहीं हो पाई है। मुकदमा पंजीकृत होने के समय वादी की बेटी नाबालिग थी। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी की जमानत अर्जी खारिज की है।