हमारी बेटिया कॉलम : अपनी बनाई मोमबत्ती एवं अन्य उत्पादों के साथ आकांक्षा गर्ग
गंगोह। कुछ बेटियां विपरीत परिस्थितियों में भी अपने हौसले से उम्मीद की नई रोशनी जला देती हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है गंगोह की आकांक्षा गर्ग की, जिन्होंने मुश्किल हालातों में न सिर्फ खुद को संभाला, बल्कि पूरे परिवार का सहारा बनीं।
साल 2018 में आकांक्षा के पिता विकास गर्ग का असमय निधन हो गया। उस समय वह केवल 18 वर्ष की थीं। उनके बड़े भाई अस्वस्थ थे और घर की जिम्मेदारी आकांक्षा पर आ गई। इस नाजुक समय में भी उन्होंने हार नहीं मानी। आकांक्षा ने हैंडमेड मोमबत्तियां एवं उपहार सामग्री बनाने का छोटा-सा काम शुरू किया। दिन-रात की मेहनत रंग लाई और धीरे-धीरे उनकी मोमबत्तियों एवं अन्य उत्पादों की मांग बढ़ने लगी।
उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने उत्पादों की बिक्री शुरू की, जिससे उनका कार्य एक नई दिशा में आगे बढ़ा। इसके साथ ही आकांक्षा ने ट्यूशन पढ़ाना भी शुरू किया ताकि आमदनी का एक और स्रोत तैयार हो सके, लेकिन उन्होंने यहीं रुकना नहीं चाहा। मां रश्मि गर्ग के साथ मिलकर उन्होंने गंगोह नगर में एक टिफिन सर्विस भी शुरू की। आकांक्षा गर्ग आज क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। साबित कर दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, आत्मबल, मेहनत और परिवार के साथ मिलकर कोई भी सपना साकार किया जा सकता है।
आपमें भी है प्रतिभा तो करें संपर्क
यदि आपकी उम्र 25 वर्ष से कम है और आप कला, खेल, शिक्षा एवं तकनीक या अन्य किसी क्षेत्र में प्रतिभा रखतीं हैं तो अमर उजाला आपको हमारी बेटियां कॉलम में स्थान देगा। इसके लिए आप संक्षिप्त जानकारी 7617707200 पर व्हाट्सएप पर कर सकते हैं। प्रकाशित के लिए चयन का अधिकार अमर उजाला का होगा।