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शोध के लिए सहारनपुर पहुंचा बीएचयू के शोधार्थियों का दल

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-पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मृदभांड परंपरा पर शोध कर रहा है दल
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के शोधार्थियों का दल इन दिनों सहारनपुर भ्रमण पर है। दल के द्वारा जनपद के पुरातात्विक स्थलों का भ्रमण किया गया। दल ने इन स्थलों से मृदभांड सहित अनेक सामग्री इकत्रित की।
दल के सहयोगी रहे शोभित विश्वविद्यालय के विरासत, यूनिवर्सिटी हेरिटेज रिसर्च सेंटर के समन्वयक राजीव उपाध्याय यायावर ने बताया कि बीएचयू की छात्रा उर्वशी सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मृदभांड परंपरा पर शोध कर रही हैं, जिनके पास चार अन्य सदस्य भी पहुंचे हैं, जिनमें डॉ. बृजमोहन, धनंजय सिंह, अभय प्रताप सिंह और अनीषा शामिल हैं। दल ने सरसावा के प्राचीन टीले, रामबाग, कादरगढ़, नया गांव, सलारपुरा, हुलास, पठानपुरा, मल्हीपुर, साढ़ौली, सकतपुर, बुड्ढाखेड़ा, हलगोआ, दल्हेड़ी, बड़गांव, नगला आदि क्षेत्रों के ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण किया। यहां से उन्होंने प्राचीन मृदभांडों को एकत्र किया। प्राप्त सामग्री की जांच बीएचयू में पुरातत्व विभाग द्वारा की जाएगी। राजीव ने बताया कि बीएचयू के शोधार्थियों के दल द्वारा पुरा मृदभांड परंपरा को लेकर हो रहा यह नया सर्वे पुरातात्विक अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। जब यह अध्ययन निष्कर्ष तक पहुंचेगा तब सहारनपुर के इतिहास की कड़ियों को जोड़ने के लिए विज्ञान आधारित नया ज्ञान भी प्राप्त हो सकेगा।
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शोधार्थियों की बात
--डॉ. बृजमोहन ने कहा कि सहारनपुर में प्राचीन इंटरलैंड हैं। यमुना के किनारे और हिंडन के किनारे लगातार मानवीय बसाव मिलते हैं। यह प्राचीन मानवीय बसाव की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मृदभांड परम्परा पर कार्य कर रही।
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--शोध छात्रा उर्वशी सिंह ने बताया इस क्षेत्र में अब तक प्राप्त मृदभांड इशारा कर रहे हैं कि क्षेत्र की पुरातनता को लेकर हम और पीछे जा सकते हैं। अधिक सटीक निष्कर्ष लैब में अध्ययन के बाद ही मिल सकेंगे, साथ ही सांस्कृतिक समानताओं, खानपान की समानताओं और असमानताओं की भी जानकारी मिल सकेगी।
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