सहारनपुर। बरसात में होने वाली जलभराव की समस्या से निपटने के लिए महानगर में अर्बन फ्लड/जल प्लावन नियंत्रण एवं स्टाॅर्म वाटर ड्रेनेज योजना के तहत काम शुरू कर दिया गया है। इसके तहत ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। सर्वे के बाद नालों का डिजाइन तैयार होगा। दावा कि जा रहा है कि उसके बाद महानगर में जलभराव और बाढ़ की समस्या नहीं रहेगी।
प्रदेश सरकार ने योजना के पहले चरण में सभी 17 नगर निगमों को लिया है, जिनमें सहारनपुर नगर निगम भी शामिल है। बता दें कि सहारनपुर में करीब 118 छोटे-बड़े नाले हैं। इनमें चार बड़े नाले प्रमुख हैं, जिनके जरिए पूरे शहर का पानी पांवधोई नदी और ढमोला नदी में गिरता है। योजना के तहत मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। इसके तहत हर वार्ड के लिए विस्तृत ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। इसकी जिम्मेदारी सीएंडडीएस को मिली है। पहले सर्वे किया जा रहा है, जिसमें केवल बड़े नालों को लिया है। योजना के तहत शहर में नए नालों का निर्माण और पुराने ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने का काम होगा। साथ ही वर्षा जल के लिए अलग से ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाएगा, जिससे बरसात का पानी सीवेज के साथ न मिले।
- तकनीक का ले रहे सहारा
शहर को जलभराव से मुक्ति दिलाने के लिए भौतिक निरीक्षण के साथ ही मशीनी सर्वे भी होगा, जिसमें आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। इसमें स्मार्ट ड्रेनेज, सेंसर आधारित मॉनिटरिंग और जीआईएस आधारित मैपिंग शामिल है।
बाढ़ नियंत्रण के उपाय
नालों में कूड़ा न जाए, इसके लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर बनाने की बात कही गई है। बता दें कि महानगर से गुजरने वाले नालों और नदियों में प्रतिदिन भारी मात्रा में कूड़ा डाला जाता है। जिस पर रोक लगाने में नगर निगम नाकाम है और आम आदमी नदियों को बचाने के लिए गंभीर नहीं है।
बाढ़ को रोकना मुश्किल काम
योजना के तहत शहर में जलभराव की समस्या से निजात दिलाई जा सकती है, लेकिन हर दो से तीन साल में पांवधोई और ढमोला नदी के तटीय क्षेत्रों में आने वाली बाढ़ से निजात दिलाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। क्योंकि लोगों ने दोनों नदियों के तटीय क्षेत्रों में नदी की सीमा में मकान बनाए हुए हैं। जब भी नदियां उफान पर आती हैं तो उनमें बाढ़ आ जाती है। ऐसे एक नहीं, करीब 12 कॉलोनियां हैं।