सहारनपुर। सरकार की महत्वाकांक्षी योनजा सहारनपुर-मुजफ्फरनगर फोरलेन हाईवे का मसौदा तैयार हो चुका है। 828 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट गागलहेड़ी, नागल, देवबंद से होकर गुजरेगा। दोनों जिले के बीच करीब 97 हेक्टेयर भूमि का उपयोग होगा। उत्तर प्रदेश स्टेट हाईवे अथॉरिटी (उपशा) को इसके निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बता दे कि सत्ता संभालने के बाद सपा सरकार ने प्रदेश में चार फोरलेन प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। जिसमें सहारनपुर-मुजफ्फरनगर भी शामिल था। घोषणा के बाद ही इस पर सर्वे शुरू हो गया था। उत्तर प्रदेश स्टेट हाइवे अथॉरिटी (उपशा) को इसके निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पहले अड़चन थी वन विभाग के पेड़। सर्वे में सामने आया कि सहारनपुर और मुजफ्फरनगर के करीब 17 हजार से अधिक पेड़ हैं, जिनका कटान होना है। इसके बाद भूमि अधिग्रहण, जिसमें मुजफ्फरनगर, देवबंद, नागल, गागलहेड़ी की करीब 97 हेक्टेयर भूमि का उपयोग होगा। 828 करोड़ रुपये इसका बजट निर्धारित किया है। अहम बात यह है कि एक बार शासन को यह प्रोजेक्ट बना कर भेजा जा चुका है, लेकिन वनाधिकार सर्टिफिकेट, डिजिटल मैपिंग समेत कुछ खामियों के साथ वापस लौटा दिया गया था। सामाजिकी वानिकी प्रभाग की प्रभागीय निदेशक अदिति शर्मा ने बताया कि दोबारा प्रस्ताव तैयार है। आपत्तियों का निराकरण कर दिया गया है। जिसे शासन को भेजा जा रहा है। प्राथमिकता रखी गई है कि प्रोजेक्ट में कोई खामियां न हो, ताकि बाद में निर्माण में रूकावट न पैदा हो।
दिल्ली-यमुनोत्री फोरलेन अभी भी अधर में
सहारनपुर। दिल्ली-यमुनोत्री फोरलेन हाईवे अभी भी अधर में ही है। वन मंत्रालय से पेड़ों के कटान की अनुमति मिल चुकी है। कटान भी करा दिया गया है, लेकिन सड़क निर्माण कार्य बंद पड़ा है। विभागीय सूत्र बता रहे हैं कि कई स्थानों पर अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। तो सड़क निर्माण का बजट भी आवंटन नहीं हुआ है। जिसकी वजह से निर्माण कार्य रुका पड़ा है।