सहारनपुर। जेवी जैन डिग्री कॉलेज में प्रबंध समिति के प्रकरण में हाईकोर्ट के स्थगनादेश के बाद डा. पीके वार्ष्णेय ने प्राचार्य पद की कुर्सी छोड़ दी है। उनकी जगह डा. वकुल बंसल ने फिर से प्राचार्य का कार्यभार संभाल लिया है। जैन कॉलेज में लंबे समय से हो रही प्रबंध समिति और प्राचार्य पद की सियासत का शिकार अब डा. पीके वार्ष्णेय बने हैं। उन्हें एक हफ्ते के अंदर ही प्राचार्य की कुर्सी छोड़नी पड़ी।
सीसीएस यूनिवर्सिटी की ओर से जारी किए गए आदेश पर प्रबंध समिति को भंग करार दिया गया था। इसके साथ ही अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) सैय्यद निजामुद्दीन को छह माह के लिए प्रशासक नियुक्त किया गया। उन्होेंने ही डा. वकुल बंसल की जगह डा. पीके वार्ष्णेय को प्राचार्य का कार्यभार सौंपा था। इसी बीच, प्रबंध समिति भंग करने के फैसले के विरोध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। कॉलेज में फिर से कार्यभार लेने वाले डा. वकुल बंसल ने कहा कि प्रबंध समिति के पक्ष में स्थगनादेश आने के बाद ही उन्होंने पूर्व की तरह जिम्मेदारी संभाली है।
प्रबंध समिति भंग करने और नए प्राचार्य को कुर्सी सौंपने के बाद समिति पदाधिकारियों और डा. बंसल ने यूनिवर्सिटी के आदेश पर कड़ी आपत्ति उठाई थी। डा. बंसल ने थाना सदर पुलिस को तहरीर देकर यह भी आरोप लगाया था कि प्राचार्य कक्ष में लगे सीसी कैमरों में से दो के कनेक्शन काट दिए गए हैं और कुछ शिक्षक भूमाफिया से मिलकर कॉलेज को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके इन आरोपों पर शिक्षकों ने भी निष्पक्ष रूप से संपत्ति की जांच कराने की चेतावनी दी थी। अब कॉलेज में फिर से कुर्सी पर प्राचार्य बदलने की स्थिति ने शिक्षकों में हड़कंप मचा दिया है।
पहले कनेक्शन जुड़वाएंगे, फिर
कार्रवाई की सोचेंगे : बंसल
कॉलेज में फिर से प्राचार्य की कुर्सी संभालने वाले डा. बंसल ने कहा कि जिन सीसी कैमरों के कनेक्शन कटवाए गए थे। उन्हें फिर से जुड़वाया जा रहा है। पहले ये कनेक्शन जुड़वाएंगे। उसके बाद कनेक्शन हटाने में शामिल शिक्षकों पर कार्रवाई के बारे में सोचेंगे।
स्थगनादेश के बाद हुआ बदलाव : एडीएम
जेवी जैन कॉलेज के प्रकरण में प्रबंध समिति के संदर्भ में स्थगनादेश आने के बाद यह बदलाव हुआ है। इससे पहले सीसीएस यूनिवर्सिटी के आदेश के अनुरूप कार्रवाई अमल में लाई गई थी।
- सैय्यद निजामुद्दीन, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व)।
मुझे कुर्सी की कोई लालसा नहीं : डा. वार्ष्णेय
मैने बिना किसी अवरोध के प्राचार्य पद की कुर्सी छोड़ दी है। अब डा. वकुल बंसल ही यह जिम्मेदारी देखेंगे। छात्र छात्राओं या शिक्षकों के बारे में कोई फैसला अब उन्हें ही करना है। उन्हें कुर्सी की कोई लालसा नहीं है।
- डा. पीके वार्ष्णेय, कुर्सी छोड़ने से पूर्व तक प्राचार्य।