देवबंद। आतंकवाद के खिलाफ वर्ष 1980 में फतवा दे चुकी इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम ने शुक्रवार को बड़ा बयान दिया है। आतंकवाद को लेकर संस्था पर सवाल उठाने वालों को करारा जवाब देते हुए दारुल उलूम ने स्पष्ट कहा कि यदि कोई ग्रेजुएट छात्र आतंकवाद में संलिप्त पाया जाता है उससे डिग्री वापल ले ली जाएगी।
इस्लामी तालीम के सबसे बड़े मरकज दारुल उलूम का नाम आतंकवाद से जोड़ने और इसमें आतंकवाद की तालीम दिए जाने जैसे गंभीर आरोपों पर यूं तो संस्था की ओर से समय समय पर जवाब दिया जाता रहा है। लेकिन इस बार दारुल उलूम ने आतंकवाद को लेकर जो बयान दिया है वो उन लोगों के मुंह पर करारा तमाचा है जो संस्था का नाम आतंकवाद से जोड़ते रहते हैं। शुक्रवार को दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी के हवाले से संस्था के जनसंपर्क अधिकारी अशरफ उस्मानी ने कहा कि सोची समझी साजिश के तहत आतंकवाद के नाम पर दारुल उलूम को निशाना बनाया जाता रहा है। जबकि दारुल उलूम पूर्व में यह कह चुका है कि संस्था के दरवाजे हर किसी के लिए खुले हुए हैं। कोई भी आकर देख सकता है कि संस्था के भीतर आतंकवाद नहीं बल्कि आपसी सौहार्द, एकता और भाईचारे का पाठ पढ़ाया जाता है। उस्मानी ने कहा कि अगर संस्था का कोई भी ग्रेजुएट छात्र आतंकवाद में संलिप्त पाया जाएगा तो संस्था उससे सनद (डिग्री) वापस लेने पर विचार कर सकती है।
दारुल उलूम में नहीं पढ़ा अलकायदा का आसिम उमर
देवबंद। अलकायदा भारतीय उपमहाद्वीप प्रमुख आसिम उमर के दारुल उलूम में शिक्षा हासिल करने के मुद्दे पर संस्था के जनसंपर्क अधिकारी अशरफ उस्मानी ने कहा कि वर्ष 1980 से लेकर 1990 तक का संस्था का रिकार्ड खंगाल लिया गया है। इस नाम के किसी भी छात्र का दाखिला संस्था में नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जिस एजेंसी ने आसिम उमर के संस्था में तालीम हासिल करने का शक जाहिर किया है वे सरासर गलत है। एजेंसी व मीडिया को चाहिए कि बिना पुष्टि किए किसी भी अफवाह को खबर न बनाएं। साथ ही उस्मानी ने कहा कि दारुल उलूम से शिक्षा प्राप्त ग्रेजुएट छात्र गर्व के साथ अपने नाम के बाद कासमी शब्द लगाते हैं जबकि आसिम उमर के नाम के सामने कासमी शब्द नहीं है, जिससे साफ हो जाता है कि उसने दारुल उलूम में तालीम हासिल नहीं की है।