सहारनपुर। एनआरएचएम घोटाले को लेकर पिछले कई माह से जारी सीबीआई की जांच में अधूरे रिकार्ड के लिए बार-बार तलब की जा रही जानकारी से स्वास्थ्य विभाग के अफसर और बाबू मुश्किल में हैं। इस रिकार्ड से जुड़े दस्तावेजों को प्रस्तुत करने की जद्दोजहद में अफसरों और बाबुओं की टेंशन बढ़ गई है।
सीबीआई की कोशिश है कि मौजूदा वित्त वर्ष के समापन से पहले ही यह अड़चन दूर कर दी जाए। कई माह से की जा रही जांच में सीबीआई की टीम अब तक चार बार स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड खंगाल चुकी है। इसके अलावा जिले के कई चिकित्सा केंद्रों का भी निरीक्षण किया जा चुका है। लेकिन वर्ष 2006 से 2011 तक के रिकार्ड की छानबीन में दवाओं की खरीद, स्वास्थ्य कार्यक्रमों के आयोजनों के खर्च, प्रचार साधनों पर किए गए व्यय, निर्माण कार्यों से जुड़े खर्चों और उनकी ऑडिट फाइलों के बारे में दी गई अधूरी जानकारियों को लेकर बार-बार जांच कराई जा रही है।
इसी सिलसिले में इस माह देहरादून सीबीआई कार्यालय में चार बार हो चुकी पूछताछ के बारे में विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह मामला पूर्व सीएमओ डा. आरके गर्ग, डा. एसके सिंह सहित अन्य अफसरों के समय का है। तब से अब तक के रिकार्ड को अपडेट करने में कुछ दस्तावेजों की दिक्कतें आ रही हैं। खरीदी गई दवाओं या कार्यक्रम आयोजनों के खर्च के जो बिल या मेमो नहीं मिल रहे हैं, उनसे जुड़े डुप्लीकेट बिल निकलवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी सिलसिले में सीबीआई कार्यालय से लौटे एक बाबू ने बताया कि जांच पड़ताल अभी जारी है। पूरी जांच के बाद सही गलत खुद साफ हो जाएगा। अभी जांच में शामिल कोई भी अधिकारी या बाबू न तो कुछ बता सकता है और न ही किसी रिकार्ड को सार्वजनिक कर सकता है।