सहारनपुर। खतरनाक चाइनीज मांझे की धार लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रही है। शहर से लेकर देहात तक धड़ल्ले से बिक रहे इस मांझे से कई हादसे हो चुके हैं। धारदार हथियार से भी तेज इस मांझे से हो रही दुर्घटनाओं के बावजूद प्रशासन इसे प्रतिबंधित करने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है। सस्ता और ज्यादा मजबूत होने के कारण पतंगबाज नासमझी में इसका प्रयोग कर रहे हैं। आसमान से जमीन पर आने तक यह जानलेवा साबित हो रहा है। सहारनपुर जिले में इसकी बड़ी खपत है।
बसंत की शुरुआत के साथ ही सहारनपुर में पतंगबाजी का पेंच लड़ना शुरू हो जाता है। इसके क्रेज और पतंग काटने की होड़ में चाइनीच मांझे ने मार्केट पर कब्जा कर लिया है। ज्यादा धारदार डोर के चक्कर में लोग चाइनीज मंाझे को पसंद कर रहे हैं। ऐसे में आसमान में पतंग के साथ मौत भी लहराती रहती है।
तीन साल पहले मार्केट में आया
मांझा व्यवसायी राव वाजिद ने बताया कि चाइनीज मांझा तीन साल पहले ही मार्केट में आया है। बड़ी खपत के कारण सहारनपुर में चाइनीज मांझा बंगलुरू से आता है। चाइनीज मांझे से कॉटन वाला साधारण मांझा तीन गुना मंहगा है। यही कारण है कि बाजार में पतंगबाज भी सुरक्षा को ताक पर रखकर इसका प्रयोग करने से गुरेज नहीं करते।
लोहा-कांच का अंश बनाता है खतरनाक
मांझे का व्यापार करने वाले आसिफ ने बताया कि चाइनीज मांझे में लोहे का अंश होता है। यही कारण है कि बिजली के तारों के संपर्क में आने से इनमें करंट भी दौड़ता है। कांच की पालिश के कारण यह धारदार बन जाता। इस पर कई बार प्रतिबंध की मांग भी उठी, मगर प्रशासनिक हीला-हवाली के कारण इसकी बिक्री जारी है।
त्वचा के लिए भी नुकसानदायक
डा. रविंद्र राणा का कहना है कि चाइनीज मांझा त्वचा के लिए बहुत नुकसानदायक है। केमिकल युक्त मांझा होने के कारण इससे कट लगने के बाद संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। चाइनीज मांझे से कट लगने के ढेरों केस आ रहे हैं। इनमें आसमान के साथ जमीन पर पड़े बेकार और उलझे मांझे लोगों को जख्मी करता है। चाइनीज मांझे से कट लगने के बाद उसका इलाज भी बड़ी सावधानी से करना होता है।
मांझे से हुए हादसे
- छह मार्च को जेल चुंगी पर मासूम आरिफ की मांझे ने गर्दन रेती
- 2012 में बिजली के तार में मांझा फंसने के कारण करंट से बालक की मौत