देवबंद। कश्मीर में लड़कियों के पहले रॉक बैंड परगाश के खिलाफ जारी फतवे का देवबंद के मुफ्तियों और उलेमा ने समर्थन करते हुए साफ कहा कि नाच गाने के लिए शरीयत में कोई गुंजाइश नहीं है। यहां तक की कौमी कार्यक्रम 15 अगस्त अथवा 26 जनवरी या अन्य प्रोग्रामों में मुस्लिमों का नाच-गाना शरीयत के अनुसार जायज नहीं है।
रविवार को कश्मीर में दसवीं कक्षा की तीन छात्राओं के रॉक बैंड परगाश को गैर इस्लामिक करार देते हुए कश्मीर के मुफ्ती-ए-आजम बशीरुद्दीन ने इसके खिलाफ फतवा जारी करते हुए कहा कि यह अनैतिक काम बंद होना चाहिए। उन्होंने रॉक बैंड कासमर्थन करने वाले मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की भी निंदा की।
रॉक बैंड के खिलाफ जारी फतवे को दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मुफ्ती आरिफ कासमी ने जायज ठहराते हुए कहा कि शरीयत में किसी भी तरह के नाच गाने की कोई इजाजत नहीं है। उन्होंने उमर अब्दुल्ला के रॉक बैंड का समर्थन पर कहा कि मुख्यमंत्री आलिम नहीं हैं शरीयत में क्या जायज है और क्या नाजायज इसका पता केवल मुफ्तियों को होता है इसलिए मुफ्ती-ए-आजम बशीरुद्दीन ने जो फतवा दिया है वह बिल्कुल सही है।
जामिया इमाम मोहम्मद अनवर शाह के वरिष्ठ उस्ताद मुफ्ती अरशद फारुखी ने कहा कि नाच गाना किसी भी तरह का हो वह इंसानी फितरत के खिलाफ है और शरीयत इसकी इजाजत नहीं देती। उन्होंने कहा कि कौमी कार्यक्रम (26 जनवरी या 15 अगस्त) हो या कोई अन्य प्रोग्रामों में मुसलमानों के लिए नाच गाना करने की शरीयत में कोई गुंजाइश नहीं है। दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद एवं मदरसा जामिया तुल अनवरिया के मोहतमिम मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने भी रॉक बैंड के खिलाफ जारी फतवे का समर्थन करते हुए कहा कि इस्लाम की नजर में नाच गाना बिल्कुल हराम है।