सहारनपुर। मोहर्रम शुरू होने के साथ ही इमाम बारगाहों में मजलिसों का दौर शुरू हो गया है। शुक्रवार को मजलिसों में हजरत मुस्लिम अलैहिस्सलाम की शहादत का फलसफा बयां किया गया।
पहली मजलिस ख्वाजा हसन मोहम्मद के आवास पर हुई। उसे इमाम जुमा वल जमाअत मौलाना इजहार हैदर ने खिताब फरमाया। दूसरी मजलिस इमाम बारगाह सामानियान में हुई। यहां लखनऊ से आए मौलाना सैय्यद हमीदुल हसन ने हजरत मुस्लिम अलैहिस्सलाम की शहादत पर रोशनी डाली।
शिया मुस्लिम विद्वानों ने मजलिसों में खिताब फरमाते हुए बताया कि हजरत मुस्लिम अलैहिस्सलाम को हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने करबला पहुंचने से पहले सफीर (दूत) बनाकर कुफा भेजा था, लेकिन इबने जियाद ने हजरत को बंदी बनाकर उन पर जुल्मों सितम किया और बाद में उन्हें किले की दीवार से गिराकर शहीद कर दिया।
उन्होंने कहा कि जिन कौमों ने अहलेबैत का रास्ता अपनाया, वे आज भी आतंकवाद के खिलाफ हैं। इस्लाम पर अंगुली उठाने वालों को अहलेबैत के मानने वालों ने अहिंसात्मक तरीके से जवाब दिया है। इस्लाम में किसी की जान-माल का नुकसान पहुंचाने की इजाजत नहीं है। जो लोग आतंकवाद का रास्ता अपना रहे हैं, वे इस्लाम के विरोधी हैं।
मजलिसों में अंजुमने अकबरिया और अंजुमने इमामिया ने नोहा ख्वानी की। एसएचए नकवी, इशरत हुसैन, नियाज हैदर, जिया अब्बास जैदी, जैगम अब्बास, काजी अकरम, जावेद हैदर जैदी, मंजर हुसैन काजमी, डा. जेड ए कौसर, फिरोज हैदर, अजहर काजमी, अनवार जैदी, जिशान हैदर समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।