...मैं अपनी जिंदगी को रेत की दीवार कर बैठी
देवबंद (सहारनपुर)। साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था चेतना द्वारा रविवार को ग्रीन पब्लिक स्कूल में कवि सम्मेलन-मुशायरा आयोजित किया गया। इसमें शायरों ने अपने कलाम और रचनाओं से श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।
कार्यक्रम का शुभारंभ नदीम अनवर की नाते-ए-पाक एवं डा. दिवाकर गर्ग की सरस्वती वंदना से किया गया। उद्घाटन डा. जुबैर अंसारी और शमा रोशन उत्तर प्रदेश जनकल्याण मंच के प्रदेशाध्यक्ष चौधरी ओमपाल सिंह ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ बसपा नेता अय्यूब बेग रहे। जावेद आसी ने पढ़ा मेरी किस्मत है हिंदुस्तान जैसी, मुझे अपनों ने ही लूटा बहुत है। दिल्ली की राधिका मित्तल ने कहा बसाकर एक नई दुनिया के हैरान कर दिया तूने, मेरे खिलते हुए गुलशन को विरान कर दिया तूने, जो रिश्ते मुस्कुराते थे कभी तेरी मोहब्बत में, उन्हें परदेश जाकर विरान कर दिया तूने। तनवीर अजमल ने पढ़ा कोई कितना भी हो हसीन मगर, आप जैसी अदा नहीं मिलती। डा. दिवाकर गर्ग ने कहा जिंदगी में लाख गम, आस ज्यादा, सास कम, दो घड़ी को ही सही आइये मुस्कुराइये। सहारनपुर की लता ने कहा मैं अपनी जिंदगी को रेत की दीवार कर बैठी, गलतफहमी में रहकर बेवफा से प्यार कर बैठी। चांद देवबंदी ने पढ़ा एक किस्सा देखना अंजाम तक लाकर रहूंगा मैं, भले दुश्मन जमाना हो तुझे पाकर रहूंगा मैं। इनके अलावा गुलजार जिगर, राशिद कमाल, सलीम राकेट, कुणाल धीमान, योगेंद्र सुंदरियाल आदि ने भी काव्य पाठ किया। अध्यक्षता जमाल नासिर और संचालन जिगर देवबंदी ने किया। इस मौके पर गौरव विवेक, हनीफ, अब्दुल अंसारी, माहिर हसन, अरविंद कुमार, मनोज पाल, तुषार धीमान, संजय कुमार, कलीम कुरैशी, कय्यूम कुरैशी आदि रहे।