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आस्था का पावन स्थल पाठेश्वर महादेव मंदिर

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सहारनपुर। पवित्र सावन का महीना चल रहा है। चारों ओर भगवान शंकर के जयकारे गूंज है। ऐसे में शहर के बीचोंबीच स्थित आस्था का प्रतीक प्राचीन श्री सिद्धपीठ पाठेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव के दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। मान्यता है कि यहां बाबा भोलेनाथ ने स्वयंभू शिवलिंग के रूप में दर्शन दिए थे।
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जिले में कई सिद्धपीठ हैं, लेकिन इनमें कोर्ट रोड स्थित केवल राम कंपाउंड स्थित श्री सिद्धपीठ पाठेश्वर महादेव मंदिर अलग ही महत्व रखता है। अरसे से दूर-दराज के लोग नियमित रूप से सोमवार को मंदिर में पूजा-अर्चना करने आते हैं। मंदिर में आने वाले हर भक्त की मुराद पूरी होती है। जानकार बताते हैं कि इस मंदिर का निर्माण डेढ़ सौ वर्ष पूर्व हुआ था। तब भगवान शंकर ने सावन के महीने में भक्तों को दर्शन दिए थे और जमीन से अपने आप शिवलिंग निकले थे। उसी के बाद मंदिर का निर्माण कराया था। श्रावण मास में मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा है। मान्यता है कि जो भक्त सात सोमवार नियमित रूप इस मंदिर में आता है, उसकी हर मुराद पूरी होती है। मंदिर का इतिहास अति प्राचीन है। दूर-दूर से रोजाना श्रद्धालु जल चढ़ाने मंदिर पहुंचते हैं। मंदिर के पुजारी अजय शास्त्री देवरानी ने बताया कि पूरे वर्ष मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। श्रावण मास में मंदिर में विभिन्न कार्यक्रम होते हैं। इसके अलावा जन्माष्टमी और गोवर्धन पर मंदिर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए हैं।
क्या है स्वयंभू शिवलिंग
सहारनपुर। शिवलिंग को बाबा भोलेनाथ का स्वरूप रूप माना जाता है। इनमें स्वयंभू शिवलिंग अति महत्व रखता है। जमीन से स्वत: उत्पन्न हुए शिवलिंग को स्वयंभू शिवलिंग कहते हैं। इस शिवलिंग को साक्षात भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है। मानव निर्मित शिवलिंग की अपेक्षा स्वयंभू शिवलिंग का अति महत्व है।
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मेहरा परिवार करता है देखरेख
सहारनपुर। इस प्राचीन मंदिर की देखरेख करने के साथ मालिकाना हक मेहरा परिवार के पास है। केवलराम कंपाउंड निवासी सुलभ मेहरा ने बताया कि केवलराम उनके दादा के दादा थे। उनके नाम से स्थापित कंपाउंड में ही मंदिर है। मंदिर की देखभाल सुलभ मेहरा और उनके पिता राम नारायण मेहरा करते हैं। उनके पूर्वजों ने ही कभी मंदिर का निर्माण कराया था। उन्होंने बताया कि मंदिर जिस स्थान पर है, वहीं स्वयंभू शिवलिंग ने भक्तों को दर्शन दिए थे।
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