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समलैंगिक संबंध भारतीय संस्कृति के खिलाफ

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देवबंद (सहारनपुर)। समलैंगिकता अपराध है या नहीं?। वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट इसे अपराध करार दे चुका है। इस पर पुनर्विचार को लेकर एक बार फिर से बहस छिड़ गई है। देवबंद के हिंदू-मुस्लिम धर्मगुरुओं ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह संस्कृति के खिलाफ है। किसी भी धर्म या शास्त्र में इस तरह की बातें नहीं लिखी हैं।
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समलैंगिक संबंधों को लेकर फिर से छिड़ी बहस पर मंगलवार को अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि इस्लाम धर्म में इसकी सख्त मनाही है। क्योंकि कुदरत का अपना निजाम होता है। मर्द की मर्द और औरत की औरत से शादी नहीं हो सकती। बाकायदा कुरआन में इसकी वजह बताते हुए कहा गया है कि शादी करने का उद्देश्य इंसानी नस्ल को बढ़ाना है। जिसकी सूरत मर्द का औरत से निकाह करना है। जिसके बाद ही इंसानी नस्ल आगे बढ़ सकती है, जबकि मर्द की मर्द से और औरत की औरत से शादी होने पर यह मकसद पूरा नहीं होता। श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित सतेंद्र शर्मा का कहना है कि समलैंगिक विवाह एकदम गलत है। हिंदू संस्कृति के आधार पर यह अमान्य है। यह विदेशी कल्चर है जिसे भारत जैसे परंपराओं के देश पर नहीं थापना चाहिए। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में इसका कोई जिक्र है। इसलिए इसे उचित नहीं ठहराया जा सकता।
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