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मीट कारोबारी के साथ मंच साझा कर काजी ने दिया एकजुटता का संदेश

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सहारनपुर। पहली बार निकाय चुनाव में मैदान में उतरी बहुजन समाज पार्टी के लिए सहारनपुर में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा रहा है। नामांकन से ठीक पहले बसपा ने पूर्व सांसद रशीद मसूद का टिकट काट दिया तो समर्थकों में बगावत उफान मारने लगी। यही कारण है कि मीट कारोबारी को प्रत्याशी बनाने के बाद मंगलवार को बसपा ने काजी के बेटे शाजान मसूद को एक मंच पर लाकर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की है। मगर, नौ नवंबर को भीम आर्मी की पंचायत जरुर राजनीतिक दलों के लिए मुसीबत बन सकती है। उधर, भीम आर्मी के जरिए सियासी दल बसपा के वोट बैंक में भी सेंधमारी का मौका नहीं छोड़ना चाहते हैं। कुल मिलाकर निकाय चुनाव में भीम आर्मी की भूमिका भी निर्णायक हो सकती है।
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दरअसल, सपा से नाराज होकर पूर्व सांसद रशीद मसूद ने बसपा का दामन धाम लिया। उसी वक्त से निकाय चुनाव में उनके परिवार के प्रत्याशी होने की बात कही जा रही थी। बसपा ने बकायदा प्रेसवार्ता कर उनकी पुत्रवधू खदीजा मसूद को प्रत्याशी घोषित किया और 48 घंटे के बाद ही पार्टी ने टिकट में बदलाव कर मीट कारोबारी फजलुर्रहमान को प्रत्याशी बना दिया। इससे काजी रशीद मसूद खेमा न केवल नाखुश हुआ बल्कि चुनावी सक्रियता से दूर भी कर लिया। दलित-मुस्लिम गठजोड़ की संभावना तलाश रही बसपा के लिए काजी रशीद मसूद का किनारा करना निकाय चुनाव में घातक हो सकता है। यही कारण है कि पार्टी के लोगों ने मंगलवार को शाजान मसूद के साथ प्रत्याशी को मंच पर लाकर समर्थकों केे काजी के साथ होने का संदेश देने की कोशिश की है। मगर, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि भीम आर्मी बसपा सहित राजनीतिक दलों के लिए मुसीबत बन सकती है। उधर, भीम आर्मी ने दोबारा खुद को एकजुट करने की जुगत से नौ नवंबर को पंचायत का ऐलान किया है। ऐसे में दूसरे राजनीतिक दल भीम आर्मी के जरिए दलित मतों में सेंधमारी कर सकते हैं।
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कांग्रेस और भाजपा की नजर
शब्बीरपुर हिंसा के बाद सुर्खियों में आई भीम आर्मी के जरिए दलित मतों में सेंधमारी के लिए कांग्रेस पुरजोर कोशिश कर रही है। एक बड़े वर्ग में भीम आर्मी की लोकप्रियता के चलते बसपा सुप्रीमो मायावती शब्बीरपुर पहुंची और डैमेज कंट्रोल की हरसंभव कोशिश की। इसके बाद कांग्रेस ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी को सहारनपुर बुलाकर दलितों के दुखती नब्ज पर हाथ धरने की पूरी कोशिश की। उधर, भाजपा भी दलितों में सेंधमारी की पूरी कोशिश है।
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