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बेहट तहसील के 86 गांवों पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा

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बेहट क्षेत्र में बाढ का फाइल फोटो - फोटो : SAHARANPUR
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बेहट (सहारनपुर)। तहसील बेहट के बाढ़ प्रभावित 86 गांवों की करीब डेढ़ लाख की आबादी को यमुना नदी और शिवालिक पहाड़ियों से निकलने वाली बरसाती नदियों की संभावित बाढ़ का खतरा है। हालांकि बाढ़ से सुरक्षा को लेकर जिलाधिकारी की बैठक के बाद स्थानीय तहसील प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम करने का दावा किया है।
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स्थानीय प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में 11 चौकी स्थापित की हैं, इनमें पांच चौकियां यमुना तटवर्ती क्षेत्र और छह चौकियां बरसाती नदियों की बाढ़ से प्रभावित इलाके में स्थापित की। इसके अलावा पांच राहत शिविर बनाने के लिए स्कूल और कॉलेज के भवन चिन्हित किए हैं। ताकि आपत काल में प्रभावित लोगों को यहां सुरक्षित रखा जा सकें। प्रत्येक राहत शिविर में 400 से 600 लोगों के ठहरने की व्यवस्था की जा सकेगी। आपात काल के लिए नाविक का नाव सहित और गोताखोरों का अनुबंध भी किया है। इन्हें जरूरत पड़ने पर कभी भी भुलाया जा सकता है। प्रत्येक बाढ़ चौकी पर संबंधित हल्का लेखपाल, स्वास्थ्य कर्मी, पशु चिकित्साधिकारी एवं सिंचाई निर्माण खंड के अवर अभियंता की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा तहसील मुख्यालय में बाढ़ कंट्रोल रूम बनाया है। इसका नंबर-132 277 2253 है, इस पर 24 घंटे कर्मचारियों की तैनाती रहेगी।
क्षेत्र के इन गांवों में बनाई बाढ़ चौकियां
बरथा कोरसी, नुनियारी, धौलरा, कस्बा गढ़, हबीबपुर तपोवन, हिंदूवाला, अलीपुर नौगांवा, जैतपुर खुर्द, कोठड़ी भागमल, कालूवाला, जहानपुर, खैरी मढ़ती आदि। इसके अलावा राहत शिविर के लिए जय किसान शाकंभरी देवी इंटर कॉलेज फतेहपुर कलां, इंदिरा गांधी इंटर कॉलेज ताल्हापुर, जनता इंटर कॉलेज बेहट, पब्लिक इंटर कॉलेज साढ़ौली कदीम, यमुना खादर इंटर कॉलेज कम्बोहमजरा आदि को चिन्हित किया है।
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बेहट क्षेत्र में बहने वाली नदियां
तहसील बेहट क्षेत्र में नदियों का जाल है। यमुना नदी के अलावा क्षेत्र में शिवालिक पहाड़ियों से निकलने वाली बरसाती नदियों में बूढ़ी यमुना नदी, गांगरोह, मशकरा, चापरी, शाकंभरी, संहश्रा, चाचा राव, हिंडन, सोलानी की बाढ़ से नुकसान होता है।
बाढ़ प्रभावित संवेदनशील गांव
रहणा, नूरपुर भरावड़, खैरी मढ़ती, छज्जा, अकबरपुर बांस, कस्बा गढ़, बरथा कोरसी, असलमपुर बरथा, नुनियारी, धौलरा, रसूलपुर उर्फ रसूली, टटौहल, जोधेबांस, शाहपुर, शाहबुद्दीनपुर, माजरी खुजनावर आदि गांव बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील हैं।
इनसेट
यमुना नदी और शिवालिक पहाड़ियों से निकलने वाली बरसाती नदियों के तेज बहाव पानी की धार से उपजाऊ जमीनों में कटाव होता है। बरसाती नदियों में बाढ़ आने पर होने वाले कटाव से तो गांवों की आबादी तक खतरा बन जाता है। यमुना नदी से हथनी कुंड बैराज से नीचे पूर्वी किनारे पर कटाव होता है, यहां कटाव को रोकने के लिए सिंचाई विभाग ने सीसी ब्लॉक आदि बनाकर कटाव को रोकने के इंतजाम किए हैं। कढ़ाई वाला घाट पर होने वाले कटाव को रोकने के लिए पत्थरों की टक्करें बनाई गई है। रही बात गांव की आबादी की तो सबसे ज्यादा खतरा पाज राणा, हीरा हेड़ी, शाहपुर, हुसैन मलकपुर आदि गांवों को है। शाहपुर और हुसैन मलकपुर में पिछले दो से तीन साल में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। नदी का बहाव गांव के बीच से होकर निकल गया था। यहां ग्रामीणों ने प्रभावी आंदोलन किया तो सिंचाई विभाग ने गांव में पत्थरों की 18 टक्करें बनवाई है, हालांकि इनके पीछे पानी से बचाव के लिए अभी तक तट बंध नहीं बन पाया है। यह स्थिति बाढ़ प्रभावित अधिकतर गांव के लिए है।

बेहट में पिछली बरसात में गांगरोह नदी में आई बाढ़ से हुए कटाव के चलते ध्वस्त हुआ संपर्क मार्ग- फोटो : SAHARANPUR

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