बरसाती नदियों में आई बाढ़, 20 से ज्यादा गांवों का संपर्क कटा
बेहट (सहारनपुर)। शिवालिक पहाड़ियों एवं मैदानी क्षेत्र में हुई मसूलाधार बारिश के बाद बृहस्पतिवार की सुबह सभी बरसाती नदियों में बाढ़ आई, जिससे नदियों से घिरे 20 से अधिक गांवों का बाहरी संपर्क कटा रहा। कई गांवों की आबादी में पानी घुस गया। चार मवेशी भी तेज बहाव पानी में बह गया। सैकड़ों बीघा भूमि पर खड़ी फसलों को बाढ़ के पानी ने तहस नहस कर दिया। बेहट-शाकंभरी देवी और बेहट-बिहारीगढ़ रूट पर बाढ़ के चलते यातायात बंद रहा। जैतपुर कलां गांव के पास नदी में रपटा क्षतिग्रस्त हो गया और प्राथमिक विद्यालय में पानी भर गया। दोपहर बाद पानी उतरना शुरू हुआ। इसके बाद ही लोगों ने राहत की सांस ली।
बुधवार रात में मैदानी एवं पहाड़ी क्षेत्र में मूसलाधार बारिश शुरू होने के बाद सुबह तक बरसी। दिन निकलते ही चौतरफा पानी ही पानी था। क्षेत्र की आधा दर्जन बरसाती नदियां पूरे उफान पर थी। लगातार जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का तेज बहाव फसलों को बर्बाद करते हुए कई गांवों की आबादी तक जा पहुंचा। शाहपुर एवं हुसैन मलकपुर गांवों में पानी आबादी में घुसने से गुलजार, नौशाद, इस्तखार, गुलफाम, इरफान, नरहसन आदि ग्रामीणों के मकान जलमग्न हो गए। गुलजार की गाय एवं इस्तार की भैंस एवं दो बकरी तेज बहाव पानी में बहकर चली गई। उनका कुछ पता नहीं चल सका। जैतपुर कलां के प्राथमिक विद्यालय में पानी भर गया। नदी का रपटा भी कटाव कर पानी ने क्षतिग्रस्त कर दिया। रपटे से होकर गुजर रहे कुछ मवेशी भी पानी के साथ बहकर आगे निकल गए। मुर्तजापुर, नौगांवा, शाहपुर, हुसैन मलकपुर, कोठड़ी बहलोलपुर, जसमोर, पठानपुरा, जैतपुर कलां, जैतपुर खुर्द, मुर्तजापुर आदि 20 से अधिक गांवों का बाहरी दुनिया से संपर्क कट गया। शाकंभरी देवी नदी में बाढ़ आने से श्रद्धालु मां के दर्शन नहीं कर सकें। सिद्धपीठ में रुके श्रद्धालुओं को वहीं शरण लेनी पड़ी। दोपहर बाद पानी कम होना शुरू हुआ तो लोगों ने राहत की सांस ली। दिन भर क्षेत्र में जन जीवन अस्त व्यस्त रहा।
आठ घंटे टापू बने रहे हुसैन मलकपुर और शाहुपर
बेहट। तहसील बेहट मुख्यालय से मात्र एक किमी की दूरी पर स्थित हुसैन मलकपुर एवं शाहपुर गांव नदियों में बाढ़ के चलते आठ घंटे टापू बने रहे। दरअसल यह गांव दोनों तरफ से नदियों से घिरे हैं। बाढ़ का पानी हुसैन मलकपुर की आबादी में घुसना शुरू हुआ तो लोगों की सांसे थम गई। ग्रामीण घबरा गए। गुलजार, मुख्तार, नौशादद आदि ने बताया कि चौतरफा पानी ही पानी था। यदि नदियों में जलस्तर और बढ़ जाता तो तबाही मच जाती। नदियों पर पुल निर्माण की मांग को लेकर इन दोनों गांवों के लोग लंबा संघर्ष कर चुके हैं। इतना नहीं शासन-प्रशासन की उपेक्षा का शिकार इन लोगों ने 2012 के विस चुनाव और इसके बाद लोकसभा चुनाव तक बहिष्कार भी किया है, लेकिन उनकी किसी ने एक नहीं सुनी।
शाकंभरी। नदियों की बाढ़ के तेज बहाव पानी ने यहां के किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया। उफनती नदियों का पानी फसलों को तहस-नहस करता हुआ निकल गया। जैतपुर कलां, जैतपुर खुर्द, मुर्तजापुर, अब्दुल्लापुर, हीराहेड़ी, पाज रायेपुर, पठानपुरा दर्जनों गांवों के किसानों की सैकड़ों बीघा भूमि में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई। इतना ही नहीं तेज बहाव पानी से भूमि कटाव के चलते भी किसानों की उपजाऊ भूमि नदियों में मिल गई। किसानों पर दोहरी मार पड़ी है।
लेखपाल हड़ताल पर चल रहे हैं। कानूनगो को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भेजकर नुकसान का आंकलन कराया जा रहा है। - सुधीर कुमार, तहसीलदार बेहट