सहारनपुर। आचार्य अजय किरण महाराज ने रूकमणी विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि जो मनुष्य सच्चे मन से ईश्वर को याद करते हैं, ईश्वर उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ते।
पायस एजूकेशनल ग्रुप के तत्वावधान में ब्रिजेशनगर में चल रही श्रीमद्भागवत में उन्होंने कहा कि जब रूकमणी विवाह योग्य हुई तो उनके पिता भीष्म को उनके विवाह की चिंता हुई। लोग रूकमणी के पास आते थे और भगवान श्री कृष्ण की प्रशंसा करते थे। रूकमणी ने निश्चय कि वह विवाह करेंगी तो श्रीकृष्ण से ही करेंगी। रूकमणी के भाई को यह बात मंजूर नहीं थी। रूकमणी ने यह संदेश एक ब्राह्मण के माध्यम से द्वारिका में भगवान श्रीकृष्ण को भेजा और उनसे विवाह की इच्छा जाहिर की। संदेश मिलने के बाद श्रीकृष्ण कुंडनीपुर की तरफ चल दिए। रूकमणी जैसे ही गिरिजा मंदिर पहुंची तो श्रीकृष्ण ने उन्हें अपने रथ पर बैठा लिया। यदुवंशियों ने उन्हें रोककर युद्ध किया और शिशुपाल पराजित हो गए। बाद में द्वारिका पहुंचकर श्रीकृष्ण ने रूकमणी से विवाह किया। पंडित राकेश मोहन, पंडित मुकेश शुक्ला, पंकज पांडेय ने पूजा अर्चना कराई। सांसद राघव लखनपाल शर्मा, मेयर संजीव वालिया, एमएलसी हेम सिंह पुण्डीर, सुनील गुप्ता, पंकज गर्ग, रोशनलाल गर्ग, उमेश कौशिक, अशोक गर्ग, विजय शंकर शर्मा, राकेश वत्स, मीनू गर्ग, संगीता, पूजा, अमित, हर्षित, राघव, सचिन भारद्वाज, शकुंतला गर्ग मौजूद रहे।