सहारनपुर। बढ़िया आमदनी के चलते जिले के किसानों का अमरूद की बागवानी की ओर तेजी से रुझान बढ़ रहा है। इसके चलते लगातार अमरूद का क्षेत्रफल बढ़ रहा है। इस समय करीब 2200 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अमरूद की बागवानी हो रही है। जनपद में बेहट और नागल क्षेत्र अमरूद के गढ बनते जा रहे हैं।
जिले के किसानों का रुझान तेजी से अमरूद की बागवानी की ओर हो रहा है। बढ़िया उत्पादन के साथ ही अच्छा भाव मिलना इसका बड़ा कारण माना जा रहा है। साथ ही बाजार में भी इसकी काफी मांग है। यहां का अमरूद स्थानीय बाजार के साथ ही दिल्ली, अंबाला, आगरा, चंडीगढ़ और एनसीआर क्षेत्र में सप्लाई होता है। किसान विशेष तौर पर इसकी शरद कालीन फसल को लेना पसंद करते हैं। अमरूद की पौधों की रोपाई दो प्रकार से होती है। इनमें एक विधि में 6 गुणा 6 मीटर और दूसरी में 3 गुणा 3 मीटर की दूरी पर बाग लगाए जाते हैं। पहली विधि में एक हेक्टेयर में 277 और दूसरी में 1111 पौधे लगते हैं। पहली विधि में एक हेक्टेयर में 140 और दूसरी में करीब 500 क्विंटल अमरूद का उत्पादन हो जाता है।
किसानों को पसंद है ये प्रजातियां
जनपद में अधिकांश किसानों की पहली पसंद इलाहाबाद सफेदा और लखनऊ 49 प्रजातियां हैं। इनके कलमी पौधों को लगाया जाता है। इसके अलावा सीआईएसएच से निकली श्वेता एवं ललित और स्थानीय बेहट कोकोनट प्रजातियों की भी अच्छी मांग है।
ये क्षेत्र बन रहे अमरूद का गढ़
जिले के कई क्षेत्र अमरूद की बागवानी के गढ़ बन गए हैं। इनमें बेहट, मिर्जापुर, भागूवाला, नागल, मायाहेड़ी, पनियाली, गंझेड़ी, विलासपुर, बिहारीगढ़ और गंगोह क्षेत्र के कई गांव शामिल हैं।
जिले में अमरूद की बागवानी का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। इसके चलते अमरूद का क्षेत्रफल 2200 हेक्टेयर हो गया है। बढ़िया उत्पादन एवं मांग के साथ ही बाजार में इसका भाव भी बागवानों को अच्छा मिल रहा है। अमरूद की शरद कालीन फसल को अधिक पसंद किया जाता है। बाजार में इसका रेट भी वर्षाकालीन अमरूद से अधिक मिल जाता है।
- अरुण कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।