सहारनपुर। सपा से शहर विधायक संजय गर्ग ने परशुराम सामाजिक संस्था के प्रदेश अध्यक्ष विनोद शर्मा को जेल भेजने एवं उस पर मुकदमे दर्ज किए जाने का मामला सदन में उठाया। उन्होंने आरोप की बिना जांच के ही विनोद शर्मा को जेल भेजने का आरोप लगाया। जबकि देहात विधायक मसूद अख्तर ने भी स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी जमीनों को लेकर सवाल उठाया।
समाजवादी पार्टी से शहर के विधायक संजय गर्ग ने सदन में सहारनपुर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि सहारनपुर के प्रतिष्ठित नागरिक एवं परशुराम सामाजिक संस्था के प्रदेश अध्यक्ष विनोद शर्मा पर पुलिस ने विपक्षियों से साठगांठ करके बिना जांच के ही जेल भेज दिया है। चार महीने से विनोद शर्मा देवबंद कारागार में बंद हैं। उन पर एक के बाद एक करके कई मामले दर्ज करा दिए गए हैं। 18 नवंबर, 16 दिसंबर एवं 17 दिसंबर 2017 को मुकदमे दर्ज करा दिए। एडीजीपी कानून व्यवस्था, डीजीपी मुख्यालय के 9 फरवरी 2018 को एसएसपी को दिए आदेश में भी इस बात का उल्लेख है कि सभी मुकदमों में बिना जांच किए गिरफ्तार करके कार्रवाई की गई है। जल्दबाजी में गिरफ्तार करने की आवश्यकता नहीं थी। पहले जांच की जानी चाहिए थी। इन फर्जी मुकदमों के आधार पर जिला प्रशासन ने विनोद शर्मा पर 6 मार्च 2018 को गैंगस्टर एक्ट भी लगा दी। जबकि उसका कोई औचित्य नहीं है। पुलिस द्वारा बिना जांच के एकतरफा कार्रवाई कर विनोद शर्मा का उत्पीड़न किया जा रहा है। इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर न्याय दिलाने के लिए शासन को निर्देशित किया जाए।
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--। विनोद शर्मा की पत्नी ने पुलिस पर लगाया पति को फंसाने का आरोप
सहारनपुर। देवबंद जेल में बंद गैंगस्टर एक्ट में निरुद्ध किए गए विनोद शर्मा की पत्नी मिथलेश शर्मा ने पुलिस पर मिलीभगत कर उसके पति विनोद शर्मा को फंसाने का आरोप लगाया है। यही नहीं पुलिस पर झूठे मुकदमे दर्ज कराए जाने का भी आरोप लगाया है। उसका आरोप है कि जिस व्यक्ति के साथ साझीदारी की उसने बैंक से दो करोड़ रुपये का लोन लेकर उनकी प्रॉपर्टी को बैंक में बंधक रख दिया गया। बाद में बेईमानी कर ली और उसके पति को पुलिस से साठगांठ कर जेल भिजवा दिया। इसके बाद मुजफ्फरनगर में फर्जी मुकदमे दर्ज कराए गए। उन्होंने इन मामलों की जांच कराकर कार्रवाई कराए जाने की मांग के लिए एसएसपी को ज्ञापन सौंपा है।