सौ हवन कुंडों में आहुतियां डालकर की जन कल्याण की कामना
गागलहेड़ी (सहारनपुर)। हिंडन नदी तट पर बाबा बंशीवाले के सानिध्य में चल रही विशाल शतमुख कोटि होमात्मक श्री विष्णु महायज्ञ एवं श्री विष्णु महापुराण कथा के छठे दिन कथा वाचक आचार्य अतुल कृष्ण ने श्रीकृष्ण जन्म का सुंदर शब्दों में वर्णन किया जिससे श्रद्धालु भाव विभोर हो गये।
बुधवार को हिंडन नदी तट स्थित हरि कॉलेज परिसर में कथा वाचक आचार्य अतुल कृष्ण ने बताया कि कंस ने अपनी प्यारी बहन को विवाह के बाद अपने बहनोई के साथ कारागार में डलवा दिया था। क्योंकि कंस को भविष्यवाणी हुई थी कि उसकी मृत्यु उसकी बहन की औलाद के हाथों होगी। आचार्य ने कहा कि जब देवकी सातवीं बार गर्भवती हुई तो उस रात घनघोर वर्षा के बीच भगवान कृष्ण का जन्म हुआ। वासुदेव ने श्री कृष्ण के प्राण बचाने के लिये एक टोकरे में उन्हें छुपाकर बंदीगृह से बाहर निकाला और यमुना पार करने लगे। उस समय बरसात के कारण यमुना अपने पूरे उफान पर थी। ऐसे में शेषनाग ने बाल रूप धारी श्रीकृष्ण के ऊपर अपना फन फैलाकर उसकी छतरी बनाई और यमुना ने भगवान का स्पर्श पाते ही उनके लिए रास्ता बना दिया।
कथा के दौरान विशाल यज्ञशाला में यज्ञाचार्य दिवाकर के सानिध्य में सौ हवन कुंडों में सात सौ यज्ञमान गगनभेदी मंत्रो उच्चारण के बीच आहुति दे रहे हैं। यज्ञाचार्य दिवाकर ने बताया कि यज्ञ जीवन को ही नहीं संपूर्ण वातावरण को शुद्ध करता है। यज्ञ ही एक ऐसी क्रिया है, जिससे तन, मन, लोक व परलोक सुधर जाते हैं। आयोजन में हरिपाल, वीरेंद्र, सुभाष, मोहित चौधरी, मयंक, मुकुल, सोनू, एनपी राठौर, लोकेश शर्मा आदि का सहयोग रहा।