फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दशहरे पर करें बुराईयों के दस रावण का दहन

विज्ञापन
विज्ञापन
सहारनपुर। असत्य पर सत्य की जीत का पर्व दशहरा हम मना रहे हैं। इस पर्व पर समाज में फैली दस बुराइयों के रावण का दहन करना जरूरी है। ताकि समाज में फैली बुराई दूर हो सकें और सहारनपुर तरक्की कर सके। इसके लिए प्रत्येक नागरिक को अपने कर्तव्य को समझकर योगदान देना होगा।
विज्ञापन

1-- कन्या भ्रूण हत्या समाज में सबसे बड़ी कुरीति है। महिला उत्पीड़न, अत्याचार और महिलाओं के साथ जघन्य अपराध की घटनाएं वर्तमान में समाज में फैली हैं। बेटा और बेटी में फर्क समझा जाता है। दशहरे पर नागरिकों को इन बुराइयों को खत्म करने का संकल्प लेना होगा।
2-- सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काकर एक-दूसरे के धर्म के बारे में गलत बयानबाजी कर सांप्रदायिकता की आग भड़काना वर्तमान समय में समाज के लिए घातक है। धर्म के नाम पर होने वाली घटनाएं वर्तमान में सबसे बड़ी बुराई हैं। सभी धर्मों के लोगों को चाहिए कि वे असत्य पर सत्य की जीत के पर्व पर सांप्रदायिक सौहार्द कायम करने को आगे आएं।
विज्ञापन

3-- पर्यावरण को दूषित होने से बचाना होगा। आज के दौर में पर्यावरण दिनोंदिन प्रदूषित होता जा रहा है। नदियों का अस्तित्व खत्म हो रहा है। पर्यावरण संतुलन बिगड़ने की वजह से मौसम भी बदलाव हो रहा है। नागरिकों को चाहिए कि वह पर्यावरण को शुद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। ताकि बिगड़ते पर्यावरण संतुलन को भविष्य में रोका जाए।
4-- सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार व खाद्य पदार्थों में मिलावट खोरी को खत्म करने के लिए नागरिकों, जनप्रतिनिधयों, सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और व्यापारियों को मिलकर आगे आना होगा। दशहरा पर्व पर रावण के पुतले के दहन के साथ भ्रष्टाचार के रावण का भी अंत करना जरूरी है।
5-- लगातार बढ़ते जा रहे जल संकट को खत्म करने के लिए भी नागरिकों को अपना कर्तव्य निभाना होगा। इसी तरह अगर जल बर्बाद होता रहा तो भविष्य में एक दिन ऐसा आएगा, जब एक-एक बूंद पानी के लिए लोगों को तरसना पड़ेगा। सभी को मिलकर जल संरक्षण के लिए आगे आना होगा।
6-- जनपद को साफ और स्वच्छ बनाने के लिए नागरिकों, जन प्रतिनिधियों और सरकारी तंत्र को प्रभावी कदम उठाने होंगे। वर्तमान में गंदगी समाज में फैली सबसे बड़ी बुराई है। प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपने घर, मोहल्ले, शहर, प्रदेश और देश को स्वच्छ और साफ-सुथरा बनाने के लिए श्रमदान करे।
7-- महंगी होती शिक्षा भी समाज में सबसे बड़ी बुराई है। गरीब व्यक्ति अपने बच्चों को मंहगी शिक्षा के कारण अच्छे स्कूल में नहीं पढ़ा पाता है। स्कूलों के प्रबंधकों, संचालकों और सोसायटी के पदाधिकारियों को महंगी शिक्षा को खत्म करने के लिए अपना योगदान देना चाहिए। ताकि समाज के सबसे निचले तबके का बच्चा भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर समाज की मुख्य धारा में जुड़ सके।
8-- बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं ना मिलने के कारण कई मरीज दम तोड़ देते हैं। सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी चिकित्सकों को मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का संकल्प लेना चाहिए। ताकि बेहतर इलाज के अभाव में कोई मरीज दम ना तोड़े।
9-- युवा पीढ़ी को चाहिए कि वह अपने माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान करें। वर्तमान में ऐसे कई बुजुर्ग वृद्धा आश्रम में अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं, जिनके बच्चे करोड़पति हैं। मगर वह अपने माता-पिता को साथ नहीं रखते हैं। समाज में यह सबसे बड़ी कुरीति है। युवा पीढ़ी को इस बुराई को खत्म करने के लिए असत्य पर सत्य की जीत के पर्व पर संकल्प लेना होगा। ताकि कोई भी बुजुर्ग पूरा परिवार होने के बावजूद वृद्घ आश्रम में अपना जीवन जीने को मजबूर ना हो।
10- विद्युत कटौती, टूटी सड़कों और अन्य मूलभूत सुविधाएं ना मिलने के कारण जनपद के लोग परेशान हैं। सिस्टम में गड़बड़ी होने की वजह से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सरकारी तंत्र और जनप्रतिनिधियों को चाहिए कि वे जनता की समस्याओं का समाधान कराकर इस बुराई को खत्म करने में अपना योगदान दें।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें