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शिवालिक में जीवनदायिनी के रूप में नजर आई हिंडन

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शिवालिक में जीवनदायिनी के रूप में नजर आई हिंडन
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सहारनपुर। हिंडन नदी का सर्वे करने में जुटी टीम बुधवार को हिंडन का उद्गम स्थल देखने कालूवाला पहुंची। टीम ने पाया कि शिवालिक क्षेत्र में हिंडन आज भी वन गुर्जरों और जंगली जीवों के लिए जीवनदायिनी बनी हुई है। टीम ने अपनी सर्वे रिपोर्ट में तमाम चीजों को दर्ज किया। जंगल में करीब 18 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद टीम लौट आई। अब टीम अपनी रिपोर्ट मेरठ कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार को सौंपेगी, जिसके बाद नदी को स्वच्छ बनाने पर काम जल्द शुरू होने की संभावना है।
मेरठ के कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार ने कुछ ही दिन पहले सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलकर हिंडन की समस्या को उनके समक्ष रखा था। उसके बाद सरकार की सक्रियता बढ़ी। तीन दिन से यूपी और दिल्ली की संयुक्त टीम हिंडन नदी का सर्वे करने में जुटी है। टीम ने नदी का उद्गम स्थल देखने के साथ ही इसकी सहायक नदियों को भी देखा। साथ ही हिंडन किन वजहों से दूषित हुई है इन कारणों को भी जाना। टीम ने पाया कि नदियों के साथ ही अनेक नाले, जिनमें ढमोला, पांवधोई और काली नदी भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। साथ ही अनेक फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी भी बड़ी समस्या है। तीसरे दिन टीम हिंडन का उद्गम स्थल देखने के लिए शिवालिक में 18 किलोमीटर भीतर कालूवाला पहुंची। उद्गम स्थल तक पहुंचने में टीम कालू रौ, खुजनावर रौ, नाई स्रोत्र, हथनी स्रोत्र के साथ ही गांव अंधाकुंडी, पीरवाड़ा से होकर गुजरी। टीम ने पाया कि अनेक वन गुर्जर हिंडन किनारे बसे हैं, जिनका जीवन हिंडन के कारण बचा हुआ है। इसके अलावा हाथियों का मल और पैरों के चिन्ह भी नदी किनारे मिले हैं। इससे साबित होता है कि हाथी और अन्य वन्य जीवों के लिए भी हिंडन जीवनदायिनी है। टीम ने उद्गम स्थल ने हिंडन के पानी का सैंपल भी भरे, जिन्हें जांच के लिए भेजेगी। साथ ही बुधवार को टीम का सर्वे भी समाप्त हो गया। सर्वे रिपोर्ट कमिश्नर मेरठ को सौंपी जाएगी, जिसके बाद हिंडन पर जल्द काम शुरू होने की उम्मीद है। हिंडन को स्वच्छ बनाने के साथ ही इसके आसपास के ऐतिहासिक स्रोत्र की भी तलाश की जा रही है, जिस पर राजीव उपाध्याय काम करेंगे। हिंडन का उदगम स्थल देखने के लिए पहुंचने वालों में क्षेत्रीय वन अधिकारी मो. गुलफाम, नीर फाउंडेशन के रमन, राजीव उपाध्याय यायावर, वन दरोगा दयाल सिंह, वन रक्षक रकम सिंह पंवार आदि शामलि रहे।
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अनेकों जान ले चुकी हिंडन
हिंडन नदी दूषित होने के बाद से अनेक वर्षों से लोगों के लिए समस्या बनी हुई है। सहारनपुर में हिंडन से सटे गांवों के हैंडपंपों का पानी पीने लायक नहीं रह गया है। मगर मजबूरन नलों के जहरीले पानी को पीकर लोग जानलेवा बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। स्थानीय लोग जहरीले पानी को पीने से होने वाली जानलेवा बीमारी को कैंसर मान रहे हैं। हैरत की बात यह है कि जिन गांवों के हैंडपंपों का पानी खराब हुआ है। शासन या प्रशासन की ओर से आज तक वहां पेयजल के लिए कोई प्रबंध नहीं किए गए हैं। आलम यह है कि अब भी लोग इस पानी को पीकर बीमारियों का शिकार बन रहे हैं।
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हिंडन के लिए अनशन भी हुए
हिंडन नदी से सटे गांवों के लोग हिंडन को साफ करने की मांग कर चुके हैं। करीब चार साल पहले बड़गांव क्षेत्र में ग्रामीणों ने एक साधू के साथ मिलकर अनशन किया था। तब तत्कालीन राज्य मंत्री राजेंद्र सिंह राणा ने ग्रामीणों का अनशन समाप्त कराते हुए उनकी मांग सरकार तक पहुंचाने का वादा किया था। इसके बाद दोबारा फिर अनशन हुआ, जिसे सांसद ने खत्म कराया था। जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने भी तत्कालीन सरकार के समक्ष हिंडन की समस्या को रखा था। सरकार ने हिंडन को साफ करने के लिए गाइडलाइन जारी की थी, मगर काम शुरू नहीं हो सका था।
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