सहारनपुर। खतौली में हुए भीषण हादसे से न तो रेल अधिकारियों ने सबक लिया और न ही शामली और बागपत में क्षतिग्रस्त पटरियों के मामले सामने आने के बाद गश्त ही बढ़ाई। पचास साल पुराने जर्जर ट्रैक पर दौड़ रहीं ट्रेनों को राम भरोसे ही छोड़ दिया गया। चाय बेचने वाला रेलवे अधिकारियों को सूचना न देता तो खतौली जैसी घटना की पुनरावृत्ति संभव थी। जबकि रेल अधिकारी मामले को गोपनीय रखे हुए हैं और लापरवाही में एक दूसरे को बचाने की जुगत में लगे हुए हैं।
सहारनपुर के जिस ट्रैक पर क्रैक आया है, वह पचास साल से भी अधिक पुराना है। यह ट्रैक जर्जर हालत में है। जिसके चलते दो दिन पूर्व ही अंबाला मंडल के डीआरएम दिनेश कुमार ने इस ट्रैक का विशेष रूप से निरीक्षण किया था। यही नहीं अधिकारियों को भी इस ट्रैक पर नजर रखने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन इस ट्रैक पर अधिकारियों ने पेट्रोलिंग में लापरवाही दिखाई। यह तो गनीमत रही कि वक्त पर एक चाय विक्रेता ने रेलवे अधिकारियों को इसी सूचना दे दी और रेलवे की तकनीकी टीम ने मौके पर पहुंचकर रेल यातायात को रुकवाकर मरम्मत कर दी। जरा सी चूक हो जाती तो खतौली जैसे हादसे की पुनरावृत्ति संभव थी। जर्जर हो चुके इस 50 साल से भी अधिक पुराने हो चुके इस ट्रैक को बदला जाना है। इसका प्रस्ताव भी रेलवे को जा चुका है।
60 केजी के ट्रैक डाले जाने हैं
तकनीकी अधिकारियों के अनुसार अभी तक इस ट्रैक पर 52 केजी के ट्रैक पड़े हुए हैं। जो काफी कमजोर हो चुके हैं। नए प्रस्ताव में इस रूट पर 60 केजी के ट्रैक डाले जाने हैं। जिस पर मौसम का भी प्रभाव कम पड़ेगा और मजबूत भी हो जाएंगे।
कार्रवाई प्रक्रिया में है : डीआरएम
मंडलीय रेल प्रबंधक दिनेश कुमार का कहना है कि सहारनपुर में हुई घटना तकनीकी कारणों से हुई थी। जिसे समय रहते ठीक करा दिया गया। यह पूरा ट्रैक ही बदला जाना है, जिसका प्रस्ताव भेजा जा चुका है और प्रक्रिया में है। नई लाइन शीघ्र ही डाली जाएगी।