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गांव चयनित हुए, नहीं दूर हो सकी गरीबी

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सहारनपुर। मिशन अंत्योदय के तहत जनपद के 162 गांवों को गरीबी मुक्त किए जाने की योजना एक वर्ष बाद भी धरातल पर नहीं उतरी है। इस योजना के तहत इन ग्रामों में विभिन्न कार्य होने थे, लेकिन हकीकत यह है कि योजना कागजों में उलझकर रह गई। वहीं, अधिकारियों का दावा है कि चयनित गांवों में काफी कार्य कराए गए। गांवों में रोजगार सेवक बनाए गए तथा प्रशिक्षण भी दिलाया गया।
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मिशन अंत्योदय के तहत गांवों को गरीबी मुक्त बनाने के लिए वर्ष 2018 की शुरूआत में जनपद के 11 विकास खंडों के 162 गांवों का चयन कर शासन को सूूची भेजी गई थी। इसके पश्चात इन गांवों में बेरोजगारी खत्म करने के साथ विभिन्न कार्य कराए जाने थे।
योजना के तहत खुले में शौच से मुक्त हो चुके गांवों को प्राथमिकता दी गई थी, लेकिन कुछ गांव में शौचालय भी अधर में ही लटके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मिशन अंत्योदय योजना के तहत खास लाभ नहीं मिला। वहीं, संबंधित विभाग के अधिकारियों का दावा है कि योजना के तहत कुछ कार्य हो चुके हैं, जो काम रह गए हैं, उन्हें भी पूरा कराया जाएगा।
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बोले ग्रामीण, सिर्फ कागजों में चल रहा काम
सहारनपुर। रामपुर मनिहारान ब्लॉक के गांव जगरौली का अंत्योदय मिशन के तहत चयन किया गया था। यहां के निवासी आदेश कुमार का कहना योजना के तहत सिर्फ कागजों में ही काम चल रहा है। गांवों में पढ़े-लिखे नौजवान बेरोजगार हैं। रोजगार के लिए उन्हें हरियाणा और उत्तराखंड का रुख करना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गांव में पात्र 9 परिवारों का चयन हुआ था, लेकिन किसी का भी पक्का मकान नहीं बना है। बेहतर शिक्षा दिए जाने से संबंधित भी कार्य नहीं हुआ है।
जगरौली निवासी जोनी ने बताया कि गांव में पशु पालन के लिए किसी भी ग्रामीण को लाभ नहीं दिया गया है। कौशल विकास योजना के तहत बेरोजगारों के समूहों का भी गठन नहीं हुआ है। गांव डकरावरकलां के अरविंद कुमार व राजेश का कहना है कि गांव के हालत बदतर हैं। आज भी शौचालय का निर्माण अधर में लटका है। पथ-प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं है।
मुजफ्फराबाद ब्लॉक के गांव पिठौरी निवासी जितेंद्र का कहना है कि कच्चे 33 मकानों की सूची में से एक भी मकान पक्का नहीं बन पाया है। गांव की सड़क की हालत भी खराब है। शाहजेब का कहना है कि बेरोजगारी खत्म करने के लिए भी प्रयास नहीं हुआ है। पशुपालन के लिए ऋण नहीं दिया गया। इसी ब्लॉक के गांव गांव चिम्मबांस के हालात भी लगभग ऐसे ही हैं। प्रधान शाहनवाज कहना है कि मिशन अंत्योदय योजना का खास लाभ नहीं मिला है। सिर्फ पथ प्रकाश के लिए खंभों पर 31 लाइटें और 15 सौर ऊर्जा से संचालित होने वाली लाइटेें लगाई गई हैं। इरफान का कहना है कि कौशल विकास मिशन के तहत प्रशिक्षण नहीं दिया गया। रोजगार के लिए महिलाओं के समूह का गठन किया गया था, जो शिक्षा के अभाव में असफल हो गया।
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प्राथमिकता से होने से थे यह काम
-- बेरोजगारी खत्म करनी थी।
-- कच्चे मकानों को पक्का बनाना था।
-- बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जानी थी।
-- पक्की सड़कें बनानी थी।
-- ग्रामीणों के समूह का गठन कर रोजगार स्थापित करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाना था।
-- पथ-प्रकाश की व्यवस्था और पशु-पालन के लिए सरकारी मदद दी जानी थी।
-- उच्च शिक्षा दिलाने के विशेष इंतजाम किए जाने थे।
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किस ब्लाक से कितने गांव हुए योजना में हुए थे शामिल
ब्लॉक------------------- गांवों की संख्या
बलियाखेड़ी-------------------18
मुजफ्फराबाद----------------20
पुवांरका----------------------14
रामपुर मनिहारान------------15
सरसावा----------------------12
साढ़ौली कदीम----------------12
देवबंद -----------------------13
नकुड़-------------------------15
नानौता-----------------------11
नागल------------------------14
गंगोह ------------------------18

मिशन अंत्योदय के तहय चयनित हुए गावों में कार्य हुए हैं, जो कार्य अधूरे रहे गए हैं। उन्हें भी पूरा कर लिया जाएगा।-------- दुुष्यंत सिंह, परियोजना निदेशक, डीआरडीए

मिशन अंतोदय में चयनित गांवों में बेरोजगारी खत्म करने के लिए हाल ही में 110 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया। समूहों में शामिल लोगों को प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। नर्सरी हब बनाने में भी स्वयं सहायता समूहों को जोड़ा गया है, जिससे समूहों में शामिल लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाया जा सके। चयनित गांवों में जो कार्य रह गए हैं, उन्हें तेजी से पूरा कराया जाएगा। -- मंशाराम यादव, जिला विकास अधिकारी
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