सहारनपुर। मौसम में आ रहे उतार चढ़ाव के चलते मूंग, उर्द, मूंगफली, तिल, बैंगन और मिर्च जैसी फसलों पर कमला कीट का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। यह कीट पत्तियों के हरे भाग को खाकर फसल को नष्ट कर देता है। जिससे फसल का उत्पादन प्रभावित होता है।
कमला कीट पत्तियों के नीचे झुंड बनाकर रहते हैं। जो केवल पत्तियों के हरे भाग को खाकर नष्ट कर देते हैं। जिसके चलते प्रभावित पत्तियां सफेद झल्ली जैसी दिखाई देने लगती है। पत्तियों में हरियाली नहीं रहने से पौधे में भोजन बनने की प्रक्रिया बंद हो जाती है। यह कीट तेजी से फैलता है। जिससे प्रभावित फसल का विकास रुक जाता है। प्रभावित फसल के उत्पादन पर काफी बुरा असर पड़ता है। इस कीट के शरीर के ऊपर बालदार होने के कारण इसके शरीर पर कई कीटनाशी रसायनों का असर नहीं होता। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि इसकी रोकथाम के लिए इस कीट का प्रकोप दिखाई देते ही उसे मसल कर उसी स्थान पर नष्ट कर देना चाहिए। यदि गिडारें बड़ी संख्या में खेत में फैल गई हो तो प्रभावित फसल पर धूल वाले कीटनाशी रसायनों का बुरकाब करना फायदेमंद रहता है।