बिहारीगढ़ (सहारनपुर)। उत्तराखंड की सीमा पर स्थित मुजफ्फराबाद ब्लाक का आखिरी गांव मोहंड पेयजल की विकराल समस्या से जूझ रहा है। जल निगम अधिकारियों ने पानी की समस्या से निपटने में हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में ग्रामीणों के सामने पेयजल आपूर्ति का गंभीर संकट खड़ा है।
छुटमलपुर-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पर शिवालिक के जंगल में बसे मोहंड में जल निगम द्वारा दस हैंडपंप स्थापित किए गए हैं। इनमें से प्रचंड गरमी के चलते भूजल स्तर नीचे चले जाने के कारण वर्तमान में नौ सरकारी हैंडपंप बंद हो गए हैं। केवल एक हैंडपंप चल रहा है और उसमें भी सबमर्सिबल पंप की मोटर डाली हुई है जिस कारण वह पानी दे रहा है। इस एक हैंडपंप से गांव की सारी आबादी की प्यास बुझा पाना संभव नहीं है। ऐसे में पीने के पानी के लिए भी संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या के निदान के लिए ग्राम सभा प्रधान पति राव गुलसनव्वर ने चार दिन पहले सभी हैंडपंपों को ठीक कराया था लेकिन दो दिन चलने के बाद ही सभी जल श्रोत गहराई में चले जाने के कारण फिर से जवाब दे गए। कुछ ग्रामीण पानी के टैंकर को पास के गांव गणेशपुर से मंगा कर काम चला रहे हैं लेकिन इसके लिए उन्हें टैंकर वाले को अपनी जेब से किराया देना पड़ रहा है।
पिछले दिनों अमर उजाला में प्रमुखता से मोहंड में पेयजल संकट का समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था जिसके बाद क्षेत्रीय विधायक नरेश सैनी ने अपनी निधि से हैंडपंप लगवाने के निर्देश जल निगम अधिकारियों को दिए थे। उप्र जल निगम के अंवर अभियंता सौरभ गुप्ता ने बताया कि फिलहाल मोहंड में पेयजल संकट के निदान के लिए उनके पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। विधायक निधि से एक नया हैंडपंप लगाया जाएगा।