गर्भवती के लिए रोजा नहीं रखने की है गुंजाइश
सहारनपुर। जमियत दावातुल मुसलीमीन के सरबराह व मारूफ आलिम इमाम क़ारी इसहाक़ गोरा के निर्देशन में चलाई जा रही रोजेदारों की हेल्पलाइन पर रोजेदार अपने सवालों के जवाब जान कर अपनी शंकाओं का समाधान कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को भी रोजेदारों ने अपनी शंकाओं का समाधान किया।
कुछ ख़ास सवालों के जवाब क़ारी इसहाक़ गोरा ने शरीयत की रोशनी में कुछ इस तरह दिए।
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प्रश्न- नखासा बाजार से सायमा ने ने जानना चाहा कि वह पांच माह की गर्भवती है। उनको बहुत कमजोरी महसूस हो रही है और उनको डॉक्टर ने ये भी कह रखा है कि रोजा रखने से बच्चे और खुद उसके स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। अब ऐसी सूरत में वह शरीयत के अनुसार क्या करे?
जवाब - यदि कोई महिला गर्भवती है और रोजे में बच्चे को या खुद उसको जान को नुकसान पहुंचने का अंदेशा है तो उस महिला के लिए गुंजाइश है कि वह रोजे न रखे। परंतु हां! बाद में क़जा करना लाजमी होगा।
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प्रश्न-इब्राहीम ने चौकी सराय से मालूम किया कि उनके पिता मस्जिद में एतेकाफ (रमजान में एक विशेष इबादत) में बैठे हैं। उस मस्जिद में नहाने का कोई खास इंतजाम नहीं है, आज कल मौसम में काफी ग़रमी है, क्या वह मस्जिद से बाहर नहाने जा सकते हैं। इससे ऐतेकाफ पर कोई असर तो नहीं आएगा?
जवाब- यदि कोई व्यक्ति ऐतेकाफ में बैठा है और वह सिर्फ ठंडक की नीयत से नहाने के लिए मस्जिद से बाहर जाता है तो ये किसी भी व्यक्ति के लिए जायज नहीं है।
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प्रश्न- शेखपुरा से नाजिला खान ने पूछा कि उसके दांतों में रोटी का अंश लगा था जब उसको निकाल रहीं थी कि अचानक दांतों से खून निकल आया। अब ऐसी सूरत में उनका रोजा रहा या नहीं?
जवाब- यदि किसी व्यक्ति के रोजे की हालत में दांतों से खून निकले परंतु हलक में ना जाए तो रोजे पर कोई फर्क नहीं आएगा।
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प्रश्न-रामपुर से जेद ने मालूम किया कि उनके काफी रुपये लोगों के पास उधार हैं। इस सूरत में उन पैसों की जकात देना किस पर फर्ज है?
जवाब- यदि उधार की राशि निसाब के बराबर या उससे ज्यादा है तो राशि हासिल होने के बाद जकात अदा करना लाजमी होगा। रकम हासिल होने में कुछ साल का समय लग गया तो गुजरे सालों की जकात देना भी जरूरी होगा।